बांदा। मौसम की मार से तबाह किसानों पर 50 अरब से भी ज्यादा रुपये का कर्ज है। इसकी अदायगी के आसार दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे। हर साल फसल धोखा दे रही है। जनपद के लगभग पांच लाख किसान क्रेडिट कार्ड और अन्य कृषि ऋणों के बोझ से दबे हैं। उन्हें अदायगी की चिंता सता रही है। दूसरी तरफ बैंक अपना पैसा वसूल करने के गुपचुप तरीके अपना रहे हैं।
पिछले तीन साल में फसलें न होने से किसानों को कर्ज का सहारा लेना पड़ा। इस दौरान जिले के बैंकों से चार लाख 54 हजार 762 किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से 38 अरब 11 करोड़ 94 लाख रुपये का कर्ज लेकर अपनी साख दांव पर लगा दी है।
इसके अलावा तीन साल में 33,720 किसानों ने 12 अरब 47 करोड़ रुपये के अन्य कृषि ऋण ले रखे हैं। हर साल फसल बेहतर होने की आस में किसान बैंकों को कर्ज अदायगी का भरोसा दे देते हैं, लेकिन उनका वादा झूठा साबित हो रहा है। उधर, शासन की रोक के चलते बैंक खुलकर वसूली नहीं कर पा रहे, लेकिन गुपचुप ढंग से अदायगी का दबाव लगातार बना रहे हैं।
तीन साल के आंकड़े बताते हैं कि हर साल लगभग डेढ़ लाख किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड से कर्ज लिया है। इसके अलावा 10 से 15 हजार किसान अन्य कृषि कार्यों के लिए ऋण लेते रहे हैं। हर साल इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है।
वर्ष 2013-14 में 1,38,264 किसानों ने 11 अरब 75 करोड़ 25 लाख रुपये केसीसी से और 11,816 किसानों ने तीन अरब 33 करोड़ अन्य कृषि ऋण लिए। वर्ष 2014-15 मेें 1,51,750 किसानों ने 12 अरब 89 करोड़ 83 लाख रुपये केसीसी और 9154 किसानों ने दो अरब 77 करोड़ 46 लाख रुपये के अन्य कृषि ऋण लिए।
वर्ष 2015-16 में यह संख्या और बढ़ गई। इस वर्ष 1,64,748 किसानों ने 13 अरब 46 करोड़ 86 लाख रुपये केसीसी से और 12,750 किसानों ने छह अरब 37 करोड़ 33 लाख रुपये अन्य कृषि कार्यों के लिए कर्ज लिया है। बैंक के यह आंकड़े बताते हैं कि कर्जदार किसानों की तादाद लगातार बढ़ रही है।