बांदा। छात्राओं की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने अहम पहल की है। अब छात्राओं को स्कूल लाने-ले जाने वाले वाहनों में महिला परिचालक की तैनाती अनिवार्य की जाएगी।
शासन के निर्देश पर एआरटीओ ने जिले के विद्यालय संचालकों को इसकी जानकारी देकर नियम का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
जिले में 83 विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के आवागमन के लिए 322 वाहन संचालित हो रहे हैं। इसमें बस व मैजिक वाहन शामिल हैं। परिवहन विभाग ने स्कूल संचालकों को स्पष्ट किया है कि छात्राओं को लाने-ले जाने वाले वाहनों में महिला परिचालक की व्यवस्था की जाए।
महिला परिचालक की व्यवस्था के साथ स्कूल वाहनों के अन्य सुरक्षा मानकों पर भी विभाग की नजर रहेगी। वाहनों की फिटनेस और परमिट दुरुस्त होना जरूरी होगा। चालक और महिला परिचालक का सत्यापन कराया जाएगा।
बसों में कैमरे, प्राथमिक उपचार के लिए दवा का इंतजाम और अग्निशमन उपकरण उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की ओर से स्कूल संचालकों को इन व्यवस्थाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखकर नियमित रूप से जांचने के लिए भी कहा गया है।
एआरटीओ श्याम लाल ने बताया कि शासन के नए निर्देश सभी विद्यालय संचालकों को बता दिए गए हैं। ऐसे विद्यालय जहां छात्राएं बस, मैजिक से यात्रा करती हैं, उसमें महिला परिचालक की व्यवस्था अनिवार्य रूप से रखी जाए। जांच के दौरान कमी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
हालिया घटनाओं के बाद सुरक्षा पर जोर
छात्राओं के साथ होने वाली घटनाओं को देखते हुए स्कूल वाहनों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। दिल्ली में डबल डेकर बस में हाल ही में हुए हादसे के बाद भी परिवहन व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं।
इसके तहत स्कूल वाहनों की फिटनेस से लेकर चालक-परिचालक के सत्यापन तक सभी बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। इससे बच्चों को सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराने के साथ स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही भी तय होगी।