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Banda News: डीएपी खाद के लिए रात पर लाइन में लगे, सुबह नहीं मिलेगी की सूचना चस्पा हुई तो सड़क पर उतरे किसान

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बांदा। डीएपी खाद के लिए पूरी रात केंद्रों के बाहर डेरा डाले किसानों को जब सुबह पता चला कि खाद नहीं मिलेगी तो वह सड़क पर उतर आए। आक्रोशित किसानों ने पहले मंडी समिति के बाहर नारेबाजी की। इसके बाद करीब 500 किसानों ने बांदा-फतेहपुर हाईवे पर जाम लगा दिया। किसानों के प्रदर्शन की सूचना पर एसडीएम व सीओ मौके पर पहुंचे और समझाया।
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वहीं, डीएम के नहीं पहुंचने पर किसान उनके कैंप कार्यालय पहुंच गए और जमकर नारेबाजी की। दोपहर तक खाद आने का आश्वासन दिया गया, पर देर शाम तक खाद नहीं पहुंची तो किसान मायूस होकर घर चले गए। किसानों का कहना था कि खाद नहीं मिलने की वजह से खेती बर्बाद हो रही है।
जनपद में अन्नदाता डीएपी खाद के लिए मारा-मारा फिर रहा है। किसानों ने किसी तरह दलहनी-तिलहनी फसलों की बोआई कर ली है। अब गेहूं बोने के लिए डीएपी खाद नहीं मिल रही है। पलेवा में हजारों रुपये खर्च कर दिए, बिना खाद खेत की नमी खत्म होती जा रही है। बोआई का समय निकलता जा रहा है।
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मंडी समिति में खोले गए तीन केंद्रों पर सोमवार को खाद बंटी न ही केंद्र मंगलवार को खुले। कई किसान मंडी समिति में खाद के लिए रात दिन डेरा डाले हुए हैं। उन्हें मंगलवार को खाद बांटने का भरोसा दिया गया था। जब सुबह 10 बजे केंद्रों में खाद वितरण नहीं होने की पर्ची चिपका दी गई तो किसान भड़क गए। करीब 500 किसान केंद्रों के सामने नारेबाजी करते हुए हाईवे पर पहुंच गए। सड़क जाम कर खाद दिलाने की मांग की। करीब आधा घंटा के बाद जाम की जानकारी मिलने पर एसडीएम सदर अमित शुक्ला व सीओ सिटी राजीव प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाया।
किसान डीएम को मौके पर बुलाने पर अड़े रहे। जब एक घंटे तक डीएम नहीं पहुंचे तो किसानों का हुजूम डीएम के कैंप कार्यालय पहुंच गया। यहां पुलिस रोकने के बावजूद किसान अंदर परिसर में दाखिल हो गए। इस बीच एसडीएम व अन्य अधिकारी किसानों से बात करने पहुंचे और जल्द खाद दिलाने का भरोसा दिया। किसान फिर मंडी पहुंचकर खाद आने का इंतजार करते रहे। देर शाम तक खाद की गाड़ियां नहीं पहुंचीं तो वह मायूस हो गए। सहकारिता विभाग के सहायक निबंधक व सहायक आयुक्त राजेश कुमार को कई बार फोन मिलाया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। न ही खाद की उपलब्धता के बारे में कोई जानकारी दी।



खाद न मिली तो पलेवा बेकार चला जाएगा
-डीएपी खाद के बिना गेहूं की बोआई नहीं हो पा रही है। खेत में पलेवा दिया गया है, जोकि बेकार हो रहा है। सातवां दिन है, मंडी में भूखे प्यासे डेरा डाले हैं। रात में सर्दी का भी सामना करते हैं। अधिकारी सिर्फ आश्वासन देते हैं, खाद नहीं।
-रामरूप, सेमरी गांव
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ऐसे तो परिवार भूखों मर जाएगा
- बलकट (किराया) पर खेत लिया है। गेहूं बोने के लिए डीएपी नहीं मिल रही। तीन दिन से मंडी में पड़े हैं। खाद नहीं मिली तो बुआई नहीं हो पाएगी। ऐसे में तो परिवार भूखों मर जाएगा।
-केदार प्रसाद, चहितारा गांव


निजी दुकानों की खाद पर किसानों को भरोसा नहीं
डीएम ने जनपद में करीब 40 निजी दुकानों को खाद बेचने के लिए अधिकृत किया है। इनमें इफको के अलावा दूसरी निजी कंपनियों की डीएपी खाद मिल रही है। आसानी से मिल रही यह खाद किसानों को रास नहीं आ रही है। किसानों का कहना है कि विक्रेता असली के बीच नकली खाद थमा रहे हैं। ऐसे में तो खेती बर्बाद हो जाएगी। निजी दुकानदारों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।


बफर गोदाम खाली, इमरजेंसी स्टाॅक भी खत्म
सप्ताह भर पहले डीएपी खाद की रैक आई थी। जनपद को 1650 टन डीएपी मिली थी। 1050 टन डीएपी समितियों में भेजकर वितरित करा दिया गया है। जो बची थी उसे भी भेज दिया गया है। अब 88 टन डीएपी ही बफर में बची है। इससे समितियों में तालाबंदी है। किसान एक-एक बोरी को मोहताज हैं। अब 22 नवंबर तक नई रैक आने की बात कही जा रही है।


-किसानों को गेहूं की बोआई के लिए जल्द ही डीएपी खाद मिलेगी। रैक पारादीप (उड़ीसा) से रवाना हो गई है। 22 तक पहुंच जाएगी। प्राइवेट दुकानों में बेहतर डीएपी उपलब्ध है, किसान उससे बोआई कर सकते हैं।
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-विजय कुमार, उप निदेशक, कृषि, बांदा

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