फसलों को बचाने के लिए किसानों ने करीब 200 अन्ना पशुओं को बाड़ लगाकर थाम तो लिया है, पर प्रशासन ने मदद करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि दूसरे दिन तो किसी तरह गायों को पुआल आदि खिलाया है। लेकिन आगे की उनके पास कोई व्यवस्था नहीं है। गायें मरीं तो प्रशासन जिम्मेदार होगा। उधर, एसडीएम ने इस बाबत कोई जवाब देना मुनासिब नहीं समझा।
अतर्रा और उसके करीब 10 मजरों में किसानों ने एकजुट होकर शनिवार को करीब 200 अन्ना गायों व बछड़ों को गौशाला बनाकर बांधा था। सरकारी मदद के लिए एसडीएम से मुलाकात की और चारा-भूसा का जैसे-तैसे इंतजाम किया। लेकिन प्रशासन किसानों के इन हालातों पर भी नहीं पसीजा।
किसान पशोपेश में हैं कि वह अपनी फसल बचाएं या अन्ना जानवरों को छोड़कर उनकी जान। हालात से परेशान किसान चंदा जुटाकर गायों को खिला रहे हैं। बताते हैं झुंड में कई जानवर बीमारी हालत में हैं। पशु डाक्टरों को बुलवाकर इलाज कराया जा रहा है। चौरिहन पुरवा में शंभू धतुरहा के यहां गौशाला में चंदे के पैसे किसानों ने रविवार को चरही बनाई और पानी पीने के लिए दूर से इंतजाम किया।
किसान शंभू धतुरहा, सुशील, सुधीर, धद्तू, रज्जू चौरिहा, रामआसरे, राकेश कुमार, राजेश कुमार, चंदू सिंह, बलबीर सिंह आदि ने कहा कि दो दिनों में प्रशासन से मदद नहीं मिली तो गायें भूखों मर जाएंगी। उधर, इस बाबत एसडीएम अतर्रा अरविंद कुमार तिवारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि चुनाव बाद देखा जाएगा और फोन काट दिया।