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अर्द्धनग्न किसानों का प्रदर्शन, नोटिस के विरोध में हाइवे जाम

Wed, 18 Mar 2015 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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मंगलवार को दूसरे दिन भी कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाका किसानों की गुहारों से गूंजता रहा। महोखर गांव में स्टेट हाइवे को किसानों ने जाम कर दिया। अन्य तहसीलों में भी प्रदर्शन हुए, ज्ञापन दिए गए।
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मोहन पुरवा गांव के कर्जदार किसानों ने बैंक द्वारा नोटिसें दिए जाने के विरोध में महोखर गांव के पास स्टेट हाइवे दो घंटे तक जाम रखा। किसानों का कहना था कि दैवीय आपदा में भी बैंक बार-बार नोटिसें देकर परेशान कर रहे हैं। एसडीएम सदर प्रहलाद सिंह ने जाम स्थल पर किसानों को आश्वासन देकर जाम खत्म कराया।

उधर, सद्गुरु सेवा समिति की अगुवाई में खप्टिहाकलां के किसानों ने कलेक्ट्रेट में अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। डीएम को ज्ञापन देकर कहा कि 48 घंटे के अंदर फसलों का सर्वे कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए वरना गांव के लोग नजदीक में बह रही केन नदी में जल सत्याग्रह करेंगे। हिंदुस्तान किसान अध्यक्ष सुरेंद्र तिवारी ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा आदि की मांग की है।
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बबेरू प्रतिनिधि के अनुसार, बुंदेलखंड किसान यूनियन, प्रधान संघ और कांग्रेस ने किसानों के साथ प्रदर्शन कर डीएम को ज्ञापन देकर मुआवजा मांगा। यूनियन के मंडल अध्यक्ष भइयालाल की अगुवाई में तहसील दिवस में मौजूद डीएम सुरेश कुमार को ज्ञापन दिया। प्रधान संघ अध्यक्ष भोला यादव और ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष आदित्य स्वरूप पांडेय की अगुवाई में डीएम को ज्ञापन सौंपे गए।

क्षेत्र पंचायत सदस्य अमर सिंह, किसान केशव प्रसाद, संदीप प्रजापति, पून के पूर्व प्रधान कुलदीप करवरिया, कांग्रेस नेता इंद्रजीत यादव, रामानुज भौंरहा, डा.इंद्रनारायण द्विवेदी, प्रधान संघ के गोपाल सिंह, माता प्रसाद, कोमल यादव, फूलचंद्र निषाद ने भी ज्ञापन दिए।

नरैनी प्रतिनिधि के अनुसार, उप जिलाधिकारी धीरज कुमार ने किसानों को आश्वासन दिया है कि फसलों का सर्वे शुरु करा दिया गया है। जल्द ही मुआवजा मिलेगा। किसान यूनियन नेताओं ने एसडीएम से मांग की कि आकलन में गड़बड़ी, भेदभाव या लापरवाही न की जाए।

ओरन प्रतिनिधि के अनुसार, सोमवार की देर शाम ओरन, बाघा, नगला पुरवा, रानीपुर, इंदू खेड़ा, भदावल, बीरी बिरहंड, तेंदुरा, मरौली, जरोहरा और बिसंडी गांव में तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि हुई। खेतों में बची-खुची फसलें भी बर्बाद हो गईं। लगभग एक दर्जन पेड़ धराशाई हो गए। बिजली के खंभे और लाइनों को नुकसान पहुंचा।

मटौंध प्रतिनिधि के अनुसार, सोमवार को तड़के हुई ओलावृष्टि ने पूर्व की दैवीय आपदा से बची-खुची फसल को भी खत्म कर दिया। खेतों में फसलों के ठूंठ नजर आ रहे हैं। जयंत सिंह, अनिल सिंह, विश्वधर अग्निहोत्री, नरेंद्र तिवारी, समदर्सी कुशवाहा आदि का कहना है मटर, लाही, मसूर, चना, अरहर की फसलें पूरी तरह खत्म हो गईं हैं। 
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