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मिट्टी परीक्षण पंजीकरण से किसान कर रहे परहेज

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प्रयोगशाला में मृदा परीक्षण करते शोध सहायक व अन्य कर्मी। - फोटो : BANDA
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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में खेतों की मिट्टी जांचने के लिए शुरू किया गया पायलट प्रोजेक्ट अभियान भी सरकार की मंशा पर खरा नहीं उतर रहा। इसमें आधार कार्ड की अनिवार्यता आड़े आ रही है। किसान आधार के साथ पंजीकरण कराने से परहेज कर रहे हैं।
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हालत यह है कि मृदा परीक्षण विभाग अब तक मंडल में 12,469 खेतों के मिट्टी नमूने ले चुका है। लेकिन इन खेतों के मात्र 32 फीसदी किसानों ने ही मिट्टी जांच के लिए अपना पंजीकरण कराया है। इनकी संख्या मात्र 4275 है। पंजीकरण न कराने वाले किसानों को उनके खेतों की मिट्टी की जांच रिपोर्ट नहीं दी जाएगी। इससे उनको यह पता नहीं चल पाएगा कि उनके खेत में किस तत्व की कमी है। इससे उत्पादन भी प्रभावित होगा।
कृषि विभाग द्वारा पूर्व में सभी खेतों का मिट्टी परीक्षण किया जाता था। अब शासन ने इसमें बदलाव करते हुए पायलट प्रोजेक्ट योजना लागू की है। इसके तहत हरेक ब्लाक में एक-एक गांव चयनित कर वहां के खेतों की मिट्टी जांची जाएगी। इसका लक्ष्य भी निर्धारित कर दिया गया है। चालू वर्ष में बांदा जिले में 3879 नमूनों का लक्ष्य है। इनमें अब तक 2818 की जांच हुई है। 1061 नमूने शेष हैं। चित्रकूट में 2292 नमूनों में 1528 की जांच हुई। 764 शेष हैं। महोबा में 2855 में से 1505 की जांच हुई और 1350 जांचना शेष हैं। हमीरपुर के बारे में विभाग का दावा है कि यहां सभी 3443 नमूनों का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है।
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उधर, लिए गए नमूनों के सापेक्ष पंजीकरण कराने वाले किसानों की संख्या 4275 (32 फीसदी) है। किसानों की इस बेरुखी के पीछे मुख्य वजह आधार कार्ड की अनिवार्यता बताई जा रही है। पंजीकरण में आधारकार्ड अनिवार्य है। किसान पंजीकरण में आधार का इस्तेमाल करने से विभिन्न आशंकाओं के चलते परहेज कर रहे हैं।
कई गांवों में नमूनों की जांच शुरू नहीं
बांदा। मंडल के तीन जिलों में आधा दर्जन गांवों में मिट्टी के नमूनों की जांच की शुरुआत नहीं हुई। इनमें बांदा का बछौंधा (बिसंडा), मंठा (बबेरू) व भांटी (कमासिन)। चित्रकूट में कुचारा (पहाड़ी) और महोबा में मौहारी (जैतपुर) व दिदवारा (पनवाड़ी) गांव शामिल हैं।
मिट्टी जांच कार्ड के लिए पंजीकृत किसान
जनपद लक्ष्य/नमूने पंजीकरण शेष
बांदा 3879 1475 2404
चित्रकूट 2292 400 1892
हमीरपुर 3443 2000 1443
महोबा 2855 400 2455
योग 12,469 4275 8194
उपचारित खेत बनेगा किसानों के लिए मॉडल
बांदा। मृदा परीक्षण लैब के प्रभारी श्रीकृष्णा ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट में चयनित हरेक गांव से 50 किसानों का चयन करके उनके खेतों में फसल का ट्रायल किया जाएगा। बुवाई से लेकर उत्पादन तक खेतों की निगरानी की जाएगी। इन खेतों को मॉडल के रूप में पेश करके अन्य गांवों के किसानों को मृदा परीक्षण के लिए प्रेरित किया जाएगा। एक हेक्टेयर तक प्रदर्शन पर शासन से किसान को 2500 रुपये अनुदान मिलेगा। पंजीकरण के लिए किसानों को प्रेरित करने के लिए चयनित गांवों में कैंप लगाए जाएंगे। संवाद
पायलट प्रोजेक्ट में शामिल गांव
बांदा। पायलट प्रोजेक्ट के तहत मृदा जांच के लिए विभाग स्तर से प्रत्येक ब्लाक में एक गांव चयनित किया गया है। बांदा में खैराडा (बड़ोखर), रेहुंटा (तिंदवारी), बुधेड़ा (जसपुरा), बरईमानपुर (महुआ), पड़मई (नरैनी), बछौंधा (बिसंडा), मंठा (बबेरू) व भांटी (कमासिन) गांव हैं। इसी तरह चित्रकूट में डांगर चितवारा (मऊ), कहेटामाफी (कर्वी), अहिरा (मानिकपुर), कुचारा (पहाड़ी), बसिंघा (रामनगर)। हमीरपुर में गुजरौरा (कुरारा), बांक (सुमेरपुर), सिलौली (मौदहा), हुसैना (मुस्करा), इटौरा (राठ), ल्योतना (गोहांड), जरिया टीला (सरीला)। महोबा में चंदपुरा (कबरई), बमरारा (चरखारी), मौहारी (जैतपुर) व दिदवारा (पनवाड़ी) शामिल हैं।
खेत का उपचार नहीं हुआ तो नहीं बढ़ेगा उत्पादन
बांदा। खेत की मिट्टी की जांच किसानों के हित में है। मिट्टी की श्रेणी, वातावरण या रासायनिक खादों के अधाधुंध इस्तेमाल से मिट्टी में होने वाली बीमारियां उत्पादन कम कर देती हैं। उत्पादन के साथ फसल की गुणवत्ता भी घटती है। कृषि विभाग खेत की मिट्टी जांचकर उसमें पाई गई बीमारियों को दूर करता है। नमूने की जांच न कराने पर किसान अपनी मिट्टी के बारे में जानकारी से वंचित रहेंगे। उपचार नहीं होगा तो उत्पादन नहीं बढ़ेगा।
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