फसल बर्बादी से परेशान होकर खुद पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा लेने वाले किसान की 19 दिन बाद जिला अस्पताल में मौत हो गई। उसे बचाने की कोशिश में उसका बड़ा भाई भी झुलस गया था। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है। मृतक किसान पर 80 हजार रुपये का कर्ज था। इतने दिन अस्पताल में तड़पते रहे झुलसे किसान की किसी अधिकारी ने सुध नहीं ली।
पैलानी तहसील के नांदादेव में 22 मार्च की सुबह 7 बजे किसान सिद्धा पाल (35) पुत्र राम जियावन ने अपने घर के खपरैल पर चढ़कर खुद के ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली थी। आग का गोला बनकर वह नीचे आ गिरा था। उसे बचाने में बड़ा भाई राम प्रसाद भी झुलस गया।
बुरी तरह झुलसे सिद्धा को डाक्टर भी बचा नहीं सके। शुक्रवार को सुबह जिला अस्पताल में सिद्धा ने दम तोड़ दिया। मौत की खबर पाकर क्षेत्रीय विधायक दलजीत सिंह पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। घटना वाले दिन भी विधायक अस्पताल आए थे और 10,000 रुपये दे गए थे।
उसी दिन एसडीएम पैलानी ने किसान के घर जाकर पूछताछ की थी। हालांकि अस्पताल कोई भी अधिकारी सिद्धा का हालचाल लेने नहीं पहुंचा। बड़े भाई ने बताया कि सिद्ध ने खेतीबाड़ी के सिलसिले में साहूकारों से 80 हजार रुपये कर्ज ले रखा था। फसल बर्बाद होने से वह निराश हो गया था।
30 हजार दी जाएगी फौरी मदद
बांदा। उप जिलाधिकारी पैलानी मनोज कुमार ने बताया कि किसान सिद्धा के परिजनों को फौरी तौर पर 30,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद से दिलाने के लिए संस्तुति की जाएगी। घटना वाले दिन वे किसान के घर गए थे। किसान के मरने की उन्हें सूचना मिली थी लेकिन व्यस्तता के चलते वे परिजनों से मिलने नहीं जा सके।