- तालाबों के आकार और लागत में की गई कटौती से आ रही अड़चन
- चित्रकूटधाम मंडल में योजना का आधा लक्ष्य भी नहीं प्राप्त हो सका
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। बुंदेलखंड क्षेत्र में गिरते भूजल स्तर को रोकने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई खेत-तालाब योजना अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने में संघर्ष कर रही है। शासन द्वारा तालाबों के आकार और लागत में की गई कटौती के कारण किसानों की इसमें रुचि कम हो गई है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन के निकट आने के बावजूद, चित्रकूटधाम मंडल में योजना का आधा लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पाया है।
चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में इस वित्तीय वर्ष के लिए कुल 2880 तालाबों का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, अब तक केवल 1027 किसानों ने ही आवेदन किया है, जिनमें से 948 पात्र पाए गए। इनमें से भी लगभग 400 किसानों ने ही तालाब खुदाई का काम शुरू किया है। यह स्थिति योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
किसानों की अरुचि का मुख्य कारण सरकार द्वारा तालाबों के आकार और लागत में की गई कटौती है। पहले, योजना के तहत दो प्रकार के बड़े तालाब बनाए जाते थे, जिनकी लागत 2,28,000 रुपये और 1,05,000 रुपये थी, और उनके आकार भी बड़े थे। वर्तमान वित्तीय वर्ष में इन दोनों प्रकारों को समाप्त कर दिया गया है।
अब केवल 10 मीटर लंबा और 10 मीटर चौड़ा तालाब खोदा जाएगा, जिसकी कुल लागत 52,500 रुपये है। किसानों का मानना है कि यह नई व्यवस्था केवल छोटे गड्ढे खोदने जैसी है और इतने छोटे तालाब से भूजल संवर्धन में कोई खास मदद नहीं मिलेगी। उन्हें यह भी लगता है कि निर्धारित लागत में तालाब की खुदाई संभव नहीं है और वास्तविक खर्च कहीं अधिक होगा।
किसानों का कहना है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में इन दोनों प्रकार के तालाबों को समाप्त कर दिया गया है। अब केवल 10 मीटर लंबा और 10 मीटर चौड़ा तालाब खोदा जाएगा। जिसकी कुल लागत 52,500 रुपये होगी। किसानों के अनुसार यह नई व्यवस्था केवल गड्ढे खुदवाने जैसी है और इतने छोटे तालाब से भूजल संवर्धन में कोई खास मदद नहीं मिलेगी। उनका मानना है कि निर्धारित लागत में तालाब की खुदाई संभव नहीं है, और वास्तविक खर्च कहीं अधिक होगा।
वर्जन
तालाबों के आकार और लागत में कमी आने के कारण किसान इस योजना में रुचि नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि लक्ष्य के सापेक्ष पर्याप्त आवेदन प्राप्त नहीं हुए हैं, जो योजना के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को उजागर करता है। अभय यादव, उप कृषि निदेशक (भूमि संरक्षण)