फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

परिजनों ने फंसाया पेंच, नहीं हुआ संक्रमित बंदी का अंतिम संस्कार

विज्ञापन
मेडिकल कालेज के मर्च्युरी हाउस में रखे गए बंदी के शव की निगरानी करती पुलिस। साथ में पोस्टमार्टम क - फोटो : BANDA
विज्ञापन
बांदा। स्वतंत्रता दिवस के दिन गैर इरादतन हत्या में जेल भेजे गए बंदी की 20वें दिन कोरोना संक्रमित होने के बाद 5 सितंबर को मौत हो गई थी। इसके बाद परिजन और जेल प्रशासन आमने-सामने है। परिजनों ने अंतिम संस्कार में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
विज्ञापन

नतीजतन छह दिन से मेडिकल कालेज की मर्च्युरी में बंदी का शव रखा है। अब डीएम ने नोटिस जारी कर परिजनों को अंतिम मौका दिया है। इसके बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा। मृतक की पत्नी ने संदिग्ध हालात में मौत और जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
पैलानी थाना क्षेत्र के चौकी पुरवा के गुलबदन को पैलानी पुलिस ने 15 अगस्त को जेल भेजा था। 6 सितंबर को जेल प्रशासन ने उसे कोरोना संक्रमित बताते हुए गंभीर हालत हो जाने पर मेडिकल कालेज रेफर कर दिया। वहां उसकी मौत हो गई। संक्रमित होने के कारण शव परिजनों को नहीं दिया गया।
विज्ञापन

उन्हें प्रशासन द्वारा किए जाने वाले अंतिम संस्कार में शामिल होने को कहा गया, लेकिन परिजन राजी नहीं हुए। तब से शव मेडिकल कालेज की मर्च्युरी में रखा हुआ है।
पत्नी जयरानी ने पुलिस अधीक्षक को दी अर्जी में कहा कि 6 सितंबर को दिन में उसे जेल से सूचना मिली थी कि पति की तबियत खराब है आकर देख जाए। वह परिजनों के साथ जेल पहुंची तो बताया गया कि गुलबदन को मेडिकल कालेज ले गए हैं।
मेडिकल कालेज में बताया गया कि उसकी मौत हो गई। पत्नी का आरोप है कि जेल प्रशासन की लापरवाही से मौत हुई है। उच्चस्तरीय जांच और 20 लाख रुपये मुआवजे की मांग की। उधर, सीएमओ डॉ. एनडी शर्मा ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव पुलिस को सौंप दिया गया था।
घरवाले अंतिम संस्कार में शामिल होने को तैयार नहीं हैं। बताया कि नियमानुसार 72 घंटे प्रतीक्षा के बाद डीएम ने मृतक के परिजनों को गुरुवार को नोटिस जारी किया। उनसे अंतिम संस्कार में उपस्थित रहने के लिए अंतिम बार कहा गया है। इसके बाद प्रशासन नियम के मुताबिक शव का निस्तारण कराएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें