बड़ोखर ब्लाक के बसहरी गांव में पशुओं के लिए बनाई गई चरही।
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बांदा। जिन गांवों में ट्यूबवेल और हैंडपंप पानी दे रहे हैं वहां पशुओं के पानी का भी जुगाड़ किया जा रहा है। जिलाधिकारी योगेश कुमार की योजना पर पूरे जनपद के गांवों में चरही बनाई जा रही है। इनमें रोजाना पानी भरकर पशुओं को पिलाया जाएगा। 118 में से 23 चरही का निर्माण पूरा हो चुका है।
डीएम ने सभी ग्राम पंचायतों को निर्देश दिया है कि 14वें वित्त आयोग के फंड से अपने गांवों में कम से कम दो स्थानों पर ट्यूबवेल या हैंडपंप के पास पक्की चरही का निर्माण कराएं। डीएम ने कहा है कि चरही छायादार स्थान पर बनाई जाए।
ताकि पशु और पानी दोनों धूप से बचे रहें। चरही का साइज छह फिट लंबी, चार फिट चौड़ी और एक फिट गहरी हो। इंडिया मार्का हैंडपंप से चरही इतनी दूर रहे कि स्थानीय लोग और बच्चे व महिलाएं हैंडपंप का आसानी से इस्तेमाल कर सकें।
चरही के आगे सोकपिट भी बनवाया जाए। डीएम ने निर्माणाधीन और बनाई जा रही चरही के फोटोग्राफ कराकर अपलोड करने के लिए भी कहा है। बड़ोखर ब्लॉक बीडीओ आरडी यादव ने बताया कि हर ब्लॉक में 118 चरही बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाया भी जा सकता है। उन्होंने बताया कि चरही का निर्माण ग्राम पंचायतें 14वें वित्त आयोग के बजट से करा रही हैं। निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। अब तक 23 चरही बनाकर इनमें पानी भरा जा चुका है। इनमें 12 चरही हैंडपंपों के पास और 11 ट्यूबवेलों के पास बनाईं गईं हैं।