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Banda News: नौकरी छोड़ने के बाद भी बीएमएम खातों से निकलाती रही रुपये

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बांदा। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) में हुए करीब एक करोड़ रुपये के गबन में नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं। समूह से जुड़ी महिलाओं की मानें तो बड़ोखर खुर्द ब्लाक की ब्लाक मिशन मैनेजर नौकरी छोड़ने के बाद भी महीनों तक संगठन अध्यक्ष के साथ मिलकर सीएलएफ का पैसा निकालती रहीं। जब नए ब्लाक मैनेजर की नियुक्ति हुई तो घपले का खुलासा हुआ।
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बड़ोखर खुर्द ब्लाक में गबन करने के मामले में ब्लाक मिशन मैनेजर आकांक्षा कुशवाहा और ग्राम संगठन अध्यक्ष कमलेश देवी सहित पांच लोगों के खिलाफ जांच के बाद कोतवाली में तहरीर दी गई है। जिला शासकीय अधिवक्ता की राय के बाद इन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। वहीं इस मामले में ग्राम संगठन से जुड़ी समूह की करीब 10 महिलाएं और शामिल रहीं। यह समूह सखी महिलाएं पांच से दस हजार रुपये बतौर कमीशन लेकर समूह की महिलाओं से पैसे की नकद निकासी कराती रहीं। तीन वर्ष तक यह खेल चलता रहा।
समूह से जुड़ी एक महिला ने बताया कि ब्लाक मैनेजर ने अपना पद छोड़ने के बाद भी महीनों तक ग्राम संगठन अध्यक्ष के साथ मिलकर समूहों से सीएलएफ का निकलवाकर गबन करती रहीं। जब नए ब्लाक मिशन मैनेजर की तैनाती हुई और रिवाल्विंग फंड सहित सीएलएफ का पैसा जमा कराने की बारी आई तो मामले का खुलासा हुआ। तीन सदस्यीय टीम ने जांच की तो तत्कालीन बीएमएम आकांक्षा कुशवाहा पर 80 लाख और कमलेश राजपूत पर 49 लाख रुपये का गबन करने का मामला सामने आया। इसमें अन्य 15 अन्य महिलाएं भी शामिल रहीं।
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एफआईआर की नौबत आने पर दस आरोपित महिलाओं ने अपने हिस्से की गबन की गई धनराशि जमा करने की मोहलत मांगी है। उधर, एनआरएलएम उपायुक्त भइययन राम ने बताया कि गबन की धनराशि की रिकवरी कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर उन्हें जेल भेजा जाएगा।

एक प्रतिशत ब्याज पर मिलती सीएलएफ की राशि
बांदा। गांवों में महिला स्वयं सहायता समूह बनाए जाते हैं। इसके उन्हें एक लाख दस हजार रुपये सीएलएफ मद से मिलते हैं। एक प्रतिशत ब्याज के साथ महिलाएं इसे आसान किस्तों में भरती हैं। इस धनराशि से समूह की महिलाएं रोजगार करती हैं।
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