बांदा। बदौसा थाना क्षेत्र की चर्चित पुलिस व एसओजी मुठभेड़ अब पूरी तरह न्यायिक जांच के घेरे में आ गई है। हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद सोमवार देर रात जिला जज की अगुवाई में न्यायिक टीम मंडल कारागार पहुंची जहां मुठभेड़ में घायल होकर गिरफ्तार किए गए आरोपी आदेश से बंद कमरे में पूछताछ की गई। करीब दो घंटे तक देर रात चली कार्रवाई के दौरान आरोपी का बयान दर्ज किया गया और जिला कारागार के अस्पताल में उसका दोबारा मेडिकल कराया गया। साथ ही उससे जुड़े अभिलेख व जांच दो घंटे के अंदर हाईकोर्ट भेज दिए गया।
इससे पहले जिला जज अल्पना सहित अन्य दो न्यायिक अधिकारियों ने जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में घायल आरोपी के मेडिकल रिकॉर्ड कब्जे में लिए थे। अस्पताल से लौटने के बाद रात 10 बजे जिला जज, एडीजे और सीजीएम की टीम सीधे मंडल कारागार पहुंची। जहां 12 बजे तक आरोपी आदेश के बयान बंद कमरे में लिए गए। इस दौरान मंडल कारागार के अस्पताल में डॉ. संजीव वर्मा द्वारा आरोपी का दोबारा मेडिकल भी कराया गया। न्यायिक अधिकारियों की इस गोपनीय कार्रवाई से पुलिस और जेल प्रशासन में देर रात तक हलचल बनी रही।
सूत्रों के अनुसार हाईकोर्ट ने मुठभेड़ की परिस्थितियों और गिरफ्तारी के समय को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोपी के परिजन ने कोर्ट में दावा किया है कि पुलिस ने उसे मुठभेड़ से चार दिन पहले ही हिरासत में ले लिया था जबकि पुलिस ने जवाबी फायरिंग में घायल होने की कहानी बताई है। उधर मंगलवार सुबह करीब छह बजे जेल प्रशासन ने आरोपी आदेश को कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच मंडल कारागार से बाहर निकाला। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उसे सीधे हाईकोर्ट ले जाया गया जहां दोपहर करीब दो बजे कोर्ट में पेश किया गया। अब सभी की नजर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है।