मुशायरे में शेर पेश करते शायर डा. इजहार खालिद।
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बांदा। ईद मिलन मुशायरे की महफिल में बदल गया। सेंवइयों की मिठास के साथ शायरों ने शेरों से ईद की खुशियां बांटीं। शुरुआत डॉ. खालिद इजहार द्वारा पढ़ी गई नात से हुई।
बुजुर्ग शायर नवाब अहमद (असर बांदवी) की सदारत में हुए ईद मिलन और मुशायरे में शायर हमराज बांदवी ने सुनाया-‘पंक्षी हैं नए हम भी फरियाद नहीं करते, देखे वो हमें कब तक आजाद नहीं करते’।
शायर हकीम बशीर तालिब ने पढ़ा-‘जान दे देते हैं हम लोग वफा पर अपनी, हम वफा का कोई बदला नहीं मांगा करते’। डा.खालिद इजहार ने सुनाया-‘मेरी कोशिश का मुझको सिला मिल गया, ढूंढते-ढूंढते नक्शेपा मिल गया’। नवाब अहमद ने पढ़ा-‘सिंम्त का है पता न खबर राह की, ले चला है किधर रहबर देखना’। बाराबंकी से आए रेहान हिंदुस्तानी सहित अजीज तारिक, शरीफ, हाफिज नजर रब्बानी, मोहम्मद अशरफ आदि ने भी अपने कलाम पेश किए। संचालन नजरे आलम (नजर बांदवी) ने किया।