तिंदवारी (बांदा)। बांदा-टांडा राष्ट्रीय राजमार्ग पर गड्ढों ने राहगीरों की जान जोखिम में डाल रखी थी। ये गड्ढे तो भर गए, लेकिन अब उनमें भरी गई डस्ट लोगों का दम घोंट रही है।
तिंदवारी कस्बे के बीच से गुजरने वाले एनएच-232 पर गड्ढों में वाहन फंसने और पलटने की खबर प्रकाशित होने के बाद एनएचएआई ने उनमें डस्ट और गिट्टी भरवाकर काम चलाऊ मरम्मत करा दी। अब इसी डस्ट से उड़ने वाली धूल राहगीरों के लिए मुसीबत बन गई है।
हालात यह हैं कि भारी वाहनों के गुजरते ही सड़क पर धूल का गुबार छा जाता है। करीब 30 मीटर से अधिक दायरे में धूल फैलने से सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है। सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते है। इससे हादसे का खतरा बना रहता है।
हाईवे किनारे रहने वाले परिवारों और दुकानदारों का कहना है कि धूल घरों और दुकानों में घुस रही है। स्कूली बच्चों, दोपहिया वाहन चालकों और रोजाना आने-जाने वाले लोगों को इसी परेशानी के बीच सफर करना पड़ रहा है।
स्थानीय अमन गुप्ता का कहना है कि घर में खाना बनाते समय किचन तक धूल आ रही है। पानी में भी धूल भर जाती है। घर के चबूतरों व अंदर फर्श पर धूल की परत जमी रहती है। स्थानीय लोगों ने ठोस समाधान की मांग की है।
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हाईवे के किनारे बसे लोग परेशान
मानसून के बाद हाईवे पर जगह-जगह गड्ढे हो गए थे। एनएचएआई ने गड्ढों में डस्ट और गिट्टी भरवाकर सड़क को दुरुस्त करने की कोशिश की। हालांकि, यह व्यवस्था ज्यादा कारगर साबित नहीं हुई। सड़क पर बिछी डस्ट वाहनों के पहियों के साथ हवा में उड़ने लगती है। ऐसे में अभी तक स्थानीय लोग वाहनों की लंबी कतार, जाम, ध्वनि प्रदूषण से परेशान थे तो अब हाईवे किनारे बसे लोग इस धूल से परेशान हैं।
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बोले लोग-
स्थानीय लोग परेशान हो रहे हैं। बरसात के समय यहां जाम ने लोगों को रुलाया था और अब धूल ने सांस लेना मुश्किल कर रखा है। एनएचएआई इसके लिए ठोस व्यवस्था करे। -इलियास खान, तिंदवारी।
धूल के कारण व्यापार करना मुश्किल हो गया। हर समय धूल का गुबार हाईवे से प्रतिष्ठानों के अंदर तक छाया रहता है। कम से कम पानी छिड़काव करके धूल को कम किया जा सकता है। -संदीप कुमार गुप्ता, व्यापारी।
फोटो 2-बांदा-टांडा मार्ग पर वाहनों से गुजरने से उठता धूल का गुबार। संवाद
फोटो 2-बांदा-टांडा मार्ग पर वाहनों से गुजरने से उठता धूल का गुबार। संवाद
फोटो 2-बांदा-टांडा मार्ग पर वाहनों से गुजरने से उठता धूल का गुबार। संवाद