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Banda News: तापमान बढ़ने से गेहूं और दलहनी फसलें सूखने लगीं, पैदावार घटी

Mon, 09 Mar 2026 12:26 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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फोटो- 16 असलम के खेत में खड़ी गेहूं की फसल, बालियां निकलने का इंतजार। संवाद
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बांदा। बुंदेलखंड क्षेत्र में रबी की फसलों पर दैवीय आपदा का संकट मंडरा रहा है। मार्च में अचानक तापमान बढ़ने और गर्म हवाओं से किसान चिंतित हैं। पिछेती गेहूं की फसलें सूखने लगी हैं, जिनमें बालियां निकली हैं उनमें दाना झुलसने का खतरा है।
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देर से बोई गई गेहूं की फसलें, जो आमतौर पर अक्टूबर में बोई जाती हैं, इस वर्ष नवंबर-दिसंबर में बोई गईं। ये फसलें बालियां निकलने से पहले ही सूख रही हैं। किसानों का कहना है कि इससे बालियां खाली रह जाएंगी और पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। प्रगतिशील किसानों के अनुसार, मार्च में तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास नहीं रहा है। गेहूं के लिए 20 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान नुकसानदायक होता है। वर्तमान में अधिकतम तापमान 28 से 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। गर्म हवाओं के कारण फसलें समय से पहले सूख रही हैं। इससे गेहूं का दाना पतला हो जाएगा और पैदावार में कमी आएगी।


दलहनी फसलों पर भी असर

गेहूं के साथ-साथ मसूर, चना और मटर जैसी दलहनी फसलें भी प्रभावित हुई हैं। समय से पहले पकने के कारण इनकी कटाई-मड़ाई शुरू हो गई है। किसानों के अनुसार, इन फसलों का दाना भी पतला हो गया है। इससे पैदावार में कमी आई है और बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
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सिंचाई की समस्या ने बढ़ाई चिंता

केन-बेतवा गठजोड़ परियोजना के तहत नहरों के पुनरोद्धार का कार्य चल रहा है। जिसके कारण किसानों को नहरों से फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। यह समस्या गर्मी के इस बढ़ते प्रकोप के साथ मिलकर किसानों की चिंता को और बढ़ा रही है।
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पैदावार पर पड़ेगा प्रतिकूल प्रभाव

प्रगतिशील किसान असलम का कहना है कि यूं तो बुंदेलखंड में अक्तूबर में रबी की फसल बो दी जाती है। लेकिन इस वर्ष बारिश के कारण नवंबर व दिसंबर माह में फसल बोई गई है। गेहूं में अभी बालियां भी ठीक से नहीं निकली हैं। फसल सूखने लगी है। ऐसे में बालिया खाली रह जाएगी। पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
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20 डिग्री से ज्यादा तापमान नुकसानदेह
प्रगतिशील किसान विज्ञान शुक्ला का कहना है कि मार्च माह में कभी भी तापमान 25 से 30 डिग्री के इर्दगिर्द नहीं रहा। गेहूं की फसल के लिए 20 डिग्री से अधिक तापमान नुकसानदेह है। मौजूद में अधिकतम तापमान 28 से 33 डिग्री होने व गर्म हवाओं से फसल समय से पहले सूख रही है। इससे दाना पतला हो जाएगा, पैदावार भी घट जाएगा।

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इनसेट-



बुंदेलखंड में बोई गई गेहूं की फसल

बांदा मंडल में बोई गई गेहूं की फसल 3.29 लाख हेक्टेअर।

झांसी मंडल में बोई गई गेहूं की फसल 2.40 लाख हेक्टेयर।
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वर्जन



कृषि विश्व विद्यालय के मौसम वैज्ञानिक दिनेश शाहा का कहना है कि पछुआ हवाओं की रफ्तार धीमी होने से तापमान के बढ़ने के आसार बढ़ गए हैं। बुंदेलखंड के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री तक पहुंच गया है।


उप कृषि निदेशक अभय यादव का कहना है कि रबी की फसल के लिए मार्च में अधिकतम तापमान 15 से 20 डिग्री होना चाहिए। इससे अधिक तापमान फसलों को नुकसान पहुंचा सकता है। समय से पहले फसलें सूख जाएंगी।
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