चित्रकूटधाम मंडल में केंद्र और राज्य सरकार ने बुंदेलखंड पैकेज समेत कई
मदों से 4.85 अरब रुपये से ज्यादा की नगरीय और ग्रामीण पेयजल योजनाएं
स्वीकृत की हैं। इन्हें अमलीजामा पहनाने के लिए पिछले आठ सालों में जल निगम
को करीब ढाई अरब रुपये मिले। इसमें से दो अरब रुपये से ज्यादा का काम
कराने का दावा किया जा रहा है। 20 फीसदी (24 परियोजनाएं) चालू होने के कुछ
ही दिनों बाद धड़ाम हो गईं।
कई परियोजनाएं डेड लाइन बीत जाने के बावजूद दो
सालों से धनाभाव के चलते शुरू नहीं हो सकीं। पठारी क्षेत्र होने के कारण
बुंदेलखंड में सिंचाई और पेयजल सबसे बड़ी समस्या है। इस समस्या को दूर करने
के लिए सरकारों ने पानी की तरह पैसा बहाया, लेकिन कार्यदाई संस्था जल निगम
ने इस पैसे में जमकर खेल किया। आठ सालों में जनता को कोई लाभ नहीं मिला।
जिला योजना
कुल धनराशि : 43 लाख 25 हजार
महोबा (बजरिया) में नलकूप रिबोर कार्य में 17.50 लाख रुपये स्वीकृत हुए। इसमें जल निगम ने पूरी रकम खर्च कर दी। काम भी 100 फीसदी पूरा दिखा दिया, पर अभी तक यह हैंडओवर नहीं हो सकी। हमीरपुर में राठ नगर पेयजल योजना (नलकूप निर्माण) में 25.75 लाख रुपये में 25.75 लाख जल निगम को दिए गए। इसमें 21.80 लाख रुपये का काम कराया गया। डेढ़ साल में इस योजना का सिर्फ 80 फीसदी कार्य हो सका है।
राज्य सरकार पेयजल योजना
कुल धनराशि : 47 करोड़ 24 लाख 80 हजार
तिंदवारी (बांदा) नगर पंचायत में पाइप लाइन विस्तार कार्य में प्रदेश सरकार ने 20 लाख रुपये दिए। जल निगम ने पूरे का कार्य करा दिया लेकिन अभी तक इसकी शुरुआत नहीं हो सकी। चित्रकूट में कर्वी पेयजल पुनर्गठन योजना फेज-प्रथम में 12 करोड़ 53 लाख 57 हजार रुपये स्वीकृत किए। जल निगम को पूरी धनराशि दे दी गई। इसमें अभी तक 11.63 करोड़ रुपये खर्च हुए। पूरा पैसा मिलने के बाद भी अभी काम अधूरा है। मानिकपुर पेयजल योजना में 44.98 लाख रुपये वर्ष 2012 में स्वीकृत हुए। जल निगम को पूरे पैसे मिल गए लेकिन अभी तक 25.50 लाख रुपये खर्च किए। काम 70 फीसदी हुआ है। महोबा पुनर्गठन पेयजल योजना के लिए 33.86 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। संस्थान ने पूरा पैसा खर्च कर योजना कागजी चालू कर दी, पर वास्तव में अभी इसमें कनेक्शन तक नहीं हुए। चरखारी पेयजल योजना वितरण प्रणाली विस्तार कार्य के लिए 20 लाख रुपये मिले। जल निगम ने पूरा पैसा खर्च कार्य पूरा दिखा दिया। वास्तविक लाभ जनता को नहीं मिल रहा है।
कांशीराम शहरी गरीब आवास पेयजल योजना
कुल धनराशि : 3 करोड़
प्रथम चरण में एक करोड़ आठ लाख रुपये मिले और जल निगम ने पूरा खर्च भी कर दिया। दूसरे चरण में इसी योजना से महोबा को 70.12 लाख और हमीरपुर को दो करोड़ 16 लाख 24 हजार रुपये मिले। महोबा में पूरी धनराशि मिली और 100 फीसदी काम भी हो गया। योजना शुरू नहीं हो सकी। हमीरपुर में रकम तो पूरी मिल गई, पर इसमें 1.35 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 65 फीसदी ही काम पूरा हो पाया है।
बुंदेलखंड पैकेज
कुल धनराशि : 2 करोड़ 50 लाख
इस योजना में महोबा को चरखारी पेयजल योजना (नलकूप कमीशन कार्य) के लिए 31.30 लाख स्वीकृत। पूरी धनराशि मिली और खर्च हो गई। जलापूर्ति का दावा किया जा रहा है। महोबा पुनर्गठन पेयजल योजना के तहत तत्कालिक कार्य को एक करोड़ 51 लाख 18 हजार स्वीकृत हुए। इसमें 61.18 लाख जल निगम को मिले। पूरा पैसा लगाकर कार्य पूरा बताया जा रहा है। महोबा में स्थाई रूप से खराब हैंडपंप के रिबोर के लिए 67.76 लाख रुपये स्वीकृत हुए। विभाग ने पूरी धनराशि ठिकाने लगा दी।
मुख्यमंत्री की घोषणा से
कुल धनराशि : 11 करोड़ 55 लाख 48 हजार रुपये
बांदा में अलीगंज जोन (अवस्थी पार्क) में बूस्टिंग पंप व सीडब्ल्यूआर के लिए 59 लाख स्वीकृत हुए। इसमें पूरी धनराशि मिल गई। विभाग ने 48.20 लाख रुपये खर्च कर दिए। काम 75 फीसदी पूरा हो सका। अभी योजना शुरू होने की उम्मीद नहीं नजर आ रही है। भूरागढ़ स्थित जल संस्थान कार्यालय में साढ़े साथ एमएलडी शोधन संयंत्र (फिल्टर पंप) से कांशीराम कृषि विश्वविद्यालय, सर्किट हाउस और जिला अस्पताल में जलापूर्ति के लिए एक करोड़ 96 लाख 43 हजार रुपये स्वीकृत हुए। इसमें 2.19 करोड़ रुपये जल निगम को मिले हैं। इसमें सवा लाख रुपये खर्च कर फिल्टर पंप बनने के बाद कबाड़ हो रहा है। शेष धनराशि न मिलने से पाइप लाइन बिछाने का कार्य शुरू नहीं हो सका।
पैसा खूब बहा, पाइप लाइनें सूखीं
बांदा। क्योटरा मरौली (बबेरू) में वर्ष 2011 में 41.20 लाख रुपये की परियोजना का कार्य मार्च 2011 में शुरू किया गया। पूरी धनराशि मिली और 32 लाख खर्च करने के बाद अभी 78 फीसदी काम हुआ है। इस योजना को मार्च 14 में पूरा हो जाना चाहिए था। पनगरा (नरैनी) में वर्ष 2012-13 में 7.97 करोड़ की लागत की पेयजल परियोजना शुरू हुई। इसमें 4.89 करोड़ रुपये मिल गए हैं।
विभाग ने 3.85 करोड़ रुपये खर्च कर दिए लेकिन काम 79 फीसदी हुआ है। इसे जुलाई 14 में पूरा होना था। अतर्रा ग्रामीण में 13.49 करोड़ की परियोजना पिछले वर्ष शुरू हुई थी। इसमें 4.81 करोड़ रुपये मिले और 1.19 करोड़ खर्च हो गए लेकिन काम 25 फीसदी ही हुआ है। इसे अगले वर्ष जुलाई में पूरा होना है। बबेरू ग्रामीण में 14.06 करोड़ की परियोजना पिछले वर्ष स्वीकृत हुई। 5.2 करोड़ मिल चुके हैं। 1.9 करोड़ खर्च के बाद काम 22 फीसदी हुआ है। मरका में 16.96 करोड़ की लागत से पाइप्ड जल योजना में 6.6 करोड़ मिले और 2.87 करोड़ खर्च कर दिए। 47 फीसदी काम हुआ है।
सिंधन में 2.84 करोड़ की परियोजना में पूरी रकम मिलने के बाद 1.37 करोड़ रुपये खर्च कर 54 फीसदी काम हुआ है। बसरेही में पूरी रकम 1.66 करोड़ मिलने के बाद सिर्फ 19 लाख खर्च कर तीन फीसदी काम किया गया है। सादी मदनपुर, महुआ, इंगुवा, जारी, कनवारा, पचनेही, मऊ, बड़ोखर बुजुर्ग और सबादा में भी कहीं काम नहीं शुरू हुआ तो कहीं शुरुआत भर की गई है। 94.79 करोड़ रुपये की इन परियोजनाओं में 35.81 करोड़ रुपये शासन ने जारी कर दिए। इसमें 12.54 करोड़ जल निगम ने खर्च कर दिए हैं।