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76 फाइलों में अटके हैं युवाओं के सपने

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बांदा। बेरोजगार युवाओं को ऋण देकर आत्मनिर्भर बनाने की सरकारी योजनाओं में बैंक आड़े आ रहे हैं। बैंकों के नकारात्मक रवैये से बड़ी संख्या में बेरोजगारों के आवेदन बैंक में धूल खा रहे हैं या दम तोड़ रहे हैं। जनपद में तीन प्रमुख ऋण योजनाओं के कुल 267 ऋण आवेदन बैंकों को भेजे गए थे। इनमें विभिन्न खामियां गिनाकर 145 आवेदन बैंकों ने निरस्त कर दिए हैं। शेष 76 फाइलें प्रक्रिया के नाम पर बैंकों में अटकी हैं। इसलिए कई युवा बैंकों में अधिकारियों की परिक्रमा लगा रहे हैं।
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प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईपी), मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना (एमवाईएसवाई) और एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) के तहत बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने की सरकारी मंशा है। इसमें सब्सिडी के साथ ब्याज दर भी कम है। सरकारी नौकरियों से वंचित शिक्षित युवा इन योजनाओं के जरिए स्वरोजगार हासिल करना चाह रहे हैं, पर उनके मंसूबे पूरे नहीं हो पा रहे।
जिला उद्योग केंद्र की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021-22 के लिए उक्त तीनों योजनाओं में कुल 90 युवाओं को ऋण देकर लाभान्वित करने का लक्ष्य है। इसके लिए 267 आवेदन आए हैं। उद्योग विभाग ने आवेदनों की फाइलें बैंकों को भेज दी हैं। यहां लंबे अरसे तक लटकाए रखने के बाद बैंकों ने 145 आवेदनों को अपने मानक में खरा न बताते हुए खारिज कर दिया है।
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ऐसे में आवेदन की औपचारिकता में बेरोजगारों द्वारा खर्च किए गए सैकड़ों रुपये और भागदौड़ तथा समय बेकार चला गया। जिससे बेरोजगार निराश हैं। बैंकों ने 46 आवेदनों को मंजूरी दी है। अब तक सिर्फ 32 युवाओं को ही ऋण मिला है। 76 फाइलें बैंक में लंबित हैं। आवेदक युवा बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं।
अग्रणी बैंक प्रबंधक, बांदा राजीव आनंद, ने कहा कि स्वरोजगार संबंधी ऋण आवेदनों को प्राथमिकता दी जा रही है। जांच आदि के बाद आवेदन मानक के मुताबिक पाए जाने पर तत्काल लाभार्थी को ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। विभिन्न योजनाओं में कुुछ फाइलें लंबित हैं। चुनाव बाद उनका भी निस्तारण किया जाएगा। अभी बैंक कर्मी चुनाव ड्यूटी में लगे हैं।
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