दहेज हत्या के मामले में अदालत ने पति, जेठ, सास व ननद को आजीवन कारावास की सजा और 20-20 हजार रुपये जुर्माना किया। ऐसे ही एक अन्य मामले में पति व देवर को 10-10 साल की सश्रम कैद व एक-एक हजार रुपये जुर्माना से दंडित किया। जुर्माना न अदा करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
फतेहगंज थाने में शीतल प्रसाद ने 31 अक्तूबर 2010 को दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि उसने अपनी पुत्री माया देवी का विवाह वर्ष 2000 में जबरापुर (फतेहगंज) निवासी नरेंद्र सिंह पुत्र रामलाल के साथ किया था। शादी के बाद ससुरालीजन पांच लाख रुपये व चौपहिया वाहन की मांग कर पुत्री को प्रताड़ित करने लगे।
पति नरेंद्र, जेठ जितेंद्र सिंह, सास ज्ञानवती व ननद उमा देवी के उत्पीड़न से परेशान माया ने कुएं में कूद कर जान दे दी। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिया। जनपद न्यायाधीश रामकृष्ण गौतम की अदालत में सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता चंद्रभूषण यादव ने दो गवाह पेश किए।
बृहस्पतिवार को अदालत ने चारों को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया। जुर्माना न अदा करने पर एक साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। धारा 498 ए, 304 बी व अन्य धाराओं में सजा व जुर्माना किया।
दहेज हत्या के अन्य मामले में विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) राम कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। ओरन (बिसंडा) निवासी मित्रा बाबू पुत्र श्रीपाल ने थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि पुत्री रेखा की शादी 13 मार्च 2002 को राजाडांड़ी (फतेहगंज) निवासी राजानाती पुत्र फल्गू प्रसाद के साथ की थी।
विवाह के बाद 50 हजार रुपये दहेज की मांग को लेकर ससुराल वाले पुत्री रेखा को प्रताड़ित करने लगे। 19 मई 2005 को पति राजानाती व देवर छोटा ने रेखा को जलाकर मार डाला। सीजेएम के आदेश पर पति और देवर के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई। सुनवाई के दौरान सहायक शासकीय अधिवक्ता फेरन सिंह पाल ने 9 गवाह पेश किए।
धारा 304 (बी) में दोनों को 10-10 वर्ष की कैद व एक-एक हजार रुपए जुर्माना और 498 (ए) में तीन साल की कैद व एक हजार रुपए जुर्माना किया। जुर्माना अदा न करने पर 6 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।