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Banda News: मुझको मत कोख में मार तू मेरे बाबुल...

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बांदा। महान शायर मिर्ज़ा गालिब की जयंती पर राजकीय महिला डिग्री कॉलेज सभागार में कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया गया। कई शहरों से आए कवियों और शायरों ने रचनाओं से मिर्ज़ा ग़ालिब की यादें ताज़ा कर दीं। इसमें शहर के प्रतिष्ठित बैरिस्टर घराने के बलखंडी नाका स्थित जमा परिवार की कोठी में मिर्ज़ा गालिब के आने और ठहरने का ज़िक्र भी हुआ।
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असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. मोहम्मद अफ़ज़ल ने ग़ालिब और बांदा के रिश्ते बयां किए। नवोदित कवि शशी प्रजापति ने ग़ालिब की मशहूर ग़ज़ल- आह को चाहिए एक उम्र असर होने तक पढ़ी। झांसी के शायर अर्जुन सिंह चांद ने ग़ज़ल सुनाई। एआरटीओ शंकरजी सिंह ने जहर बिरह का पी लूंगी, अधरों को भी सी लूंगी, पेश की। कानपुर से आई शिखा मिश्रा ने बेटियों पर ग़ज़ल पढ़ी- मुझको मत कोख में मार तू मेरे बाबुल, तेरे बेटों से भी आगे मैं निकल सकती हूं। प्रयागराज से आए शायर अफ़ज़ल इलाहाबादी ने कई ग़ज़ल सुनाए।
फतेहपुर के शिवम हथगामी और बांदा के युवा शायर अनुराग विश्वकर्मा ने गजलें पढ़ीं। फिरोजाबाद से आए हास्य व्यंग के शायर ज़ीरो बांदवी ने बेटी और बेटों की सोच पर शेर पढ़ा। अध्यक्षता कर रहे डीएसओ उबैदुर रहमान, शिवशरण बंधु फतेहपुर, डाॅ. खालिद इज़हार, अब्बा बांदवी, डाॅ. शबाना रफीक, आयुषी त्रिपाठी ने भी कलाम सुनाए।
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मुख्य अतिथि सीडीओ वेद प्रकाश मौर्य ने भी शेर पेश किए। विशिष्ट अतिथि डॉ. मोहम्मद रफीक और डॉ. शेख सऊद उज़ ज़मा (सादी ज़मा) ने भी कार्यक्रम को सराहा। संचालन युवा शायर नजरे आलम ने किया। प्राचार्य डाॅ. दीपाली गुप्ता और आयोजक समिति ने सभी शायरों व अतिथियों को अंगवस्त्र और स्मृतिचिह्न देकर सम्मानित किया।
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