गैस कनेक्शन लेने वालों को शायद यह पता नहीं कि कनेक्शन के साथ उनका लाखों का दुर्घटना बीमा भी हो जाता है। इस बारे में एजेंसी संचालक भी उन्हें कुछ बताना जरूरी नहीं समझते हैं। इसके चलते कभी कोई हादसा होने पर लोग क्लेम ही नहीं कर पाते और अपने इस अधिकार से वंचित रह जाते हैं। जिले में करीब दो लाख उपभोक्ता हैं, पर बीमा की जानकारी शायद ही किसी को हो। प्रचार प्रसार के नाम पर जिम्मेदारों ने चुप्पी साध रखी है।
गैस कनेक्शन के साथ लाखों रुपये का दुर्घटना बीमा होता है। विभागीय सूत्रों की मानें तो गैस कनेक्शन लेते ही उपभोक्ता का 10 से 25 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा हो जाता है। कनेक्शन के समय उपभोक्ता से बीमा की धनराशि भी काटी जाती है। गैस सिलेंडर से अनहोनी होने पर पीड़ित बीमा का क्लेम कर सकता है। सामूहिक दुर्घटना होने पर 50 लाख रुपये तक देने का प्रावधान है। इसके लिये दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर पीड़ित को संबंधित एजेंसी और स्थानीय थाने में इसकी सूचना देनी होगी।
दुर्घटना में मृत्यु होने पर जरूरी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराना होगा। एजेंसी अपने क्षेत्रीय कार्यालय और क्षेत्रीय कार्यालय की बीमा कंपनी को मामला सौंप देती है। इसके बाद बीमा कंपनी अपने स्तर पर जांच पड़ताल के बाद संतुष्ट होने पर पीड़ित को बीमा की राशि देती है। जिले में करीब दो लाख से ऊपर गैस कनेक्शन धारक हैं। इसमें से कितने को दुर्घटना बीमा की जानकारी है, यह कहना मुश्किल है। लेकिन जितने लोगों से बात हुई वे बीमा के बारे में सुनकर चौंके जरूर। इन लोगों के पास सालों से कनेक्शन हैं।
पर उन्हें अभी तक एजेंसी से इसकी जानकारी नहीं मिली। पिछले साल गैस रिसाव में झुलसने से 7 मौतें हो चुकी हैं। घरेलू गैस सिलेंडर से साल में दर्जनों हादसे होते हैं, पर जानकारी के अभाव में क्लेम किसी को नहीं मिल पाता। घरेलू व व्यवसायिक गैस सिलेंडर से हादसे के बाद क्लेम पाने के लिए कुछ शर्तों का भी पालन जरूरी है। गैस कनेक्शन वैध हो और चूल्हा आईएसआई मार्क का होना चाहिए। गैस एजेंसी से मिली पाइप व रेगुलेटर ही इस्तेमाल हो।
लापरवाही से गैस के इस्तेमाल पर क्षतिपूर्ति नहीं मिलेगी। गैस इस्तेमाल करने की जगह पर बिजली का तार खुला न हो। चूल्हे का स्थान सिलेंडर से ऊंचे होना चाहिए। जिला पूर्ति अधिकारी, बांदा कुमार निर्मलेंदु ने कहा कि कनेक्शन लेते समय उपभोक्ता का बीमा हो जाता है। एजेंसी संचालकों की जिम्मेदारी है कि वे दुर्घटना बीमा से संबंधित जानकारी उपभोक्ताओं को दें। ताकि उनको इस बारे में जानकारी हो सके। जरूरत पड़ने पर वे उसका लाभ ले सकें।