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महिला अस्पताल में डॉक्टर न रेडियोलॉजिस्ट

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doctor nor radiologist in women's hospital - फोटो : BANDA
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बांदा। कोरोना महामारी के दौरान शासन का पूरा ध्यान स्वास्थ्य सेवाओं पर रहा, पर डॉक्टरों की कमी दूर नहीं हो सकी। जिला महिला अस्पताल का सबसे बुरा हाल है। यहां स्वीकृत आठ पदों में छह रिक्त हैं। यहां रेडियोलाजिस्ट न होने से कीमती अल्ट्रासाउंड मशीन पिछले चार साल से धूल फांक रही है। गर्भवती महिलाओं को निजी लैबों में जाकर 600 से ज्यादा रुपये खर्च कर अल्ट्रासाउंड कराना मजबूरी है।
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मंडल मुख्यालय का जिला महिला अस्पताल 30 बेड का है। जबकि मौजूदा समय में मरीजों की संख्या के मुताबिक जरूरत 50 बेड के अस्पताल की है। रोजाना यहां औसतन 20 प्रसव होते हैं।
महिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है। सीएमएस डॉ. सुनीता सिंह और प्रभारी चिकित्साधिकारी/डीजीओ (एल-1) पद पर कार्यरत डॉ. चारु गौतम महिला मरीजों का इलाज और प्रसव करा रही हैं। सर्जरी की जरूरत होने पर पुरुष अस्पताल से एनेस्थेटिस्ट बुलाना पड़ता है।
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महिला अस्पताल में चिकित्सकों का ब्योरा-
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पद स्वीकृत कार्यरत रिक्त
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मुख्य चिकित्सा अधीक्षक 01 01 00
स्त्री रोग विशेषज्ञ 01 00 01
प्रभारी अधीक्षक (औषधि भंडार) 01 00 01
एनेस्थेटिस्ट 01 00 01
रेडियोलॉजिस्ट 01 00 01
पैथालॉजिस्ट 01 00 01
चिकित्साधिकारी/ईएमओ 01 01 00
वरिष्ठ विशेषज्ञ महिला (पीपीसी) 01 00 01
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योग 08 02 06
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50 बेड के हिसाब से स्टाफ की जरूरत
बांदा। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुनीता सिंह ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट सहित अन्य डॉक्टरों के खाली पदों के बारे में लगातार पत्र भेजकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा रहा है। हाल ही में सीएमओ के माध्यम से भी डॉक्टरों के रिक्त पदों का ब्योरा निदेशालय को भेजा है। 30 बेड के अस्पताल के आधार पर पद स्वीकृत हैं, जबकि मौजूदा समय में 50 बेड के हिसाब से स्टाफ की जरूरत है। तीन संविदा और एक स्थायी स्टाफ नर्स नहीं है। रेडियोलॉजिस्ट न होने से गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड पुरुष अस्पताल में निर्धारित दिवस सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को होता है। यहां भी महोबा के रेडियोलॉजिस्ट संबद्ध हैं और वही अल्ट्रासाउंड करते हैं।
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दूसरे विभाग के विशेषज्ञ संभाले हैं जिम्मेदारी
सीएमएस डॉ. सुनीता सिंह ने बताया कि औषधि भंडार प्रभारी अधीक्षक की जिम्मेदारी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हरनाथ सिंह को सौंपी गई है। इसी तरह पैथालॉजिस्ट में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आदित्य मिश्रा को संबद्ध कर रखा है। जिससे व्यवस्थाएं न गड़बड़ाएं। मूल पद खाली होने से परेशानी का सामना करना पड़ता है। सर्जरी केस वह खुद करती हैं। बेहोशी के लिए एनेस्थेटिस्ट पुरुष अस्पताल से बुलाते हैं।
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