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जीवनभर नाव पलटै की घटना न भुलिहों

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Do not forget the incident of boat overturning throughout life - फोटो : BANDA
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बांदा। यमुना नदी में नाव पलटने के बाद तैरकर सुरक्षित निकले बांदा के मुड़वारा गांव के ब्रजकिशोर और फतेहपुर के करन यादव की आंखों में खौफ समाया है। वह तीन दिन से सो नहीं पा रहे। रविवार को उनका हाल जाना तो बोल उठे, ‘ई जिंदगी यमुना नदी मा नाव पलटै की घटना न भुलिहों। इन आंखन ने जो मंजर देखौ, अबहु तक नींद नहीं आवत’।
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बताया कि रक्षाबंधन पर बहन से राखी बंधवाने के लिए उसे फतेहपुर के असोथर गांव जाना था। त्योहार होने से इस पार से उस पार जाने वालों की घाट पर भीड़ थी। नाविक भी कमाई के चक्कर में ज्यादा से ज्यादा लोगों को बैठाने में लगा था।
क्षण भर में नाव खचाखच भर गई। कम से कम 50 लोग सवार होंगे। बाइक और साइकिलें अलग लाद लीं थीं। बाढ़ से यमुना नदी उफान पर थी। हवाओं से लहरें बहुत तेज थीं। जलधारा के बीच पहुंचते ही नाव बहकने लगी। पलक झपकते ही पलट गई। सभी सवार तेज धारा में गिरकर बहने लगे। कई लोग एक के ऊपर एक गिरे तो कुछ लोगों ने बचने की कोशिश में एक-दूसरे को पकड़ लिया और गहरे पानी में समाते चले गए।
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मरका गांव के दुर्गेश निषाद और फतेहपुर के प्रेममऊ कटरा गांव निवासी केपी यादव भी उसी नाव पर सवार थे, जो यमुना नदी में डूब गई। इन्होंने बताया कि तेज धारा में नाव पलटते ही सभी अपनी जान बचाने में लग गए। अच्छा तैरने वाले भी डूब रहे लोगों को बचाने के लिए उनके पास नहीं जा रहे थे।
सभी किसी तरह तैरकर नदी से बाहर निकलने की सोच रहे थे। बताया कि नदी पार करने में इतना थक गए थे कि किनारे पहुंचते-पहुंचते हाथ-पैर नहीं चल रहे थे, लेकिन सामने मौत देखकर किसी तरह बाहर निकल आए। हमें मलाल है कि अपनी जान के सामने दूसरे का ध्यान नहीं दिया। इसका पछतावा जिंदगी भर रहेगा।
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