बांदा। आलू उत्पादक किसानों को इस वर्ष निराश होना
पड़ेगा। उन्हें सरकारी प्रमाणित बीज नहीं मिलेगा। उद्यान विभाग ने शासन से
बीज मंगाने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
शासन को भेजी रिपोर्ट में कहा
है कि यहां किसान आलू की खेती में रुचि नहीं लेते हैं। बीज बेकार चला
जाएगा। विभाग ने आवंटन निरस्त करने का अनुरोध किया है, जबकि उद्यान विभाग
के आंकड़ों में ही हर साल करीब 500 हेक्टेयर क्षेत्र में जिले में किसान
आलू की उपज लेते हैं। अधिकारियों की इस कार्यशैली से किसान भी हैरान हैं।
बुंदेलखंड
में जबरदस्त सूखा और दैवी आपदा से त्रस्त किसान अब बागवानी, साग-भाजी की
ओर रुख कर रहे हैं। शासन का भी इसी बात पर जोर है कि किसानों को आलू,
मसाला, सब्जी और बागवानी के लिए प्रोत्साहित किया जाए, लेकिन उद्यान विभाग
के अधिकारी शासन की इस मंशा पर पानी फेर रहे हैं।
उद्यान निदेशालय
ने यहां के अधिकारियों को प्रमाणित आलू बीज आवंटन के लिए पिछले माह पत्र
भेजा था, लेकिन अधिकारियों ने बिना प्रचार-प्रसार किए ही मान लिया कि किसान
आलू नहीं बोएंगे।
कृषि उप निदेशक ने शासन को पत्र भेजकर आवंटन
निरस्त करने का अनुरोध किया। इसके पीछे तर्क दिया है कि अखबारों के माध्यम
से किसानों से आलू बीज के लिए आवेदन मांगे थे, लेकिन अभी तक किसी ने इसमें
रुचि नहीं दिखाई।
आलू का बीज आएगा तो बेकार हो जाएगा। दूसरी तरफ
रिपोर्ट में यह भी हवाला दिया है कि किसान अपने निजी उपयोग के लिए कुछ
हिस्से में आलू की खेती करते हैं। विभाग का ही आंकड़ा है कि चित्रकूटधाम
मंडल में करीब 500 हेक्टेयर में आलू की खेती होती है।
उधर, किसान
इस वर्ष आलू के बीज के लिए प्राइवेट आढ़तियों के यहां चक्कर लगा रहे हैं।
बीज के नाम पर आढ़ती किसानों का जमकर शोषण करते हैं। महंगा दाम होने के बाद
बीज भी घटिया और बेकार रहता है।
ऐसे में किसानों की पूंजी भी
डूबने की आशंका है। तिंदवारा के किसान शिवनारायण, सिंघौली (तिंदवारी) के
शिवनंदन इत्यादि का कहना है कि बीज के लिए उद्यान विभाग में पखवारे से
चक्कर लगा रहे हैं।
कहीं आलू बीज नहीं मिल रहा है। मजबूरी में
कानपुर से एक बोरी बीज मंगाना पड़ा। इस बाबत जानकारी के लिए प्रयास किया तो
उद्यान उप निदेशक मनोहर सिंह का मोबाइल स्विच आफ रहा। जिला उद्यान अधिकारी
परवेज खां ने चुनाव ड्यूटी में होने की बात कहकर फोन काट दिया।