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डीएम ने चार्ज संभाला, बिना अनुमति छुट्टियों पर रोक

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जिला पंचायत में प्रशासक के रूप में कार्य संभालते डीएम आनंद कुमार सिंह। - फोटो : BANDA
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बांदा। जिला पंचायत अध्यक्ष और बोर्ड का बुधवार की रात कार्यकाल खत्म हो जाने पर 14 जनवरी को जिलाधिकारी आनंद कुमार सिंह ने प्रशासक के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। उन्होंने जिला पंचायत कार्यालय का भ्रमण कर सभी अनुभागों, अधिकारियों और कर्मचारियों के बारे में जानकारी ली। आदेश दिए कि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी बिना अनुमति के मुख्यालय से बाहर नहीं जाएंगे।
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जिला पंचायतों का कार्यकाल 13 जनवरी को रात 12 बजे खत्म हो जाने पर शासन ने जिलाधिकारियों को जिला पंचायत की कमान प्रशासक के रूप में सौंपी है। डीएम ने कार्यभार ग्रहण की औपचारिकता पूरी करने के बाद अपर मुख्य अधिकारी एलएन खरे को निर्देश दिए कि सभी कर्मचारियों और उनको सौंपे गए कार्यों/पटल की सूची उन्हें उपलब्ध कराएं। डीएम ने जिला पंचायत द्वारा कराए जाने वाले कार्यों और मौजूदा में चल रहे कार्यों की जानकारी मांगी। साथ ही जिला पंचायत की संपत्तियां, भूमि और चल रहे निर्माण कार्य आदि का भी पूरा ब्योरा पेश करने को कहा है।
डीएम/प्रशासक ने जिला पंचायत के सभी पटल, अतिथि कक्ष, सभागार और पार्क आदि का निरीक्षण किया। गंदगी पाने पर असंतोष जताया। अपर मुख्य अधिकारी से कहा कि पूरे परिसर और कार्यालय की सफाई, रोशनी व्यवस्था और अभिलेखों का रखरखाव तत्काल अच्छा और सुदृढ़ बनाएं। उन्होंने खबरदार किया कि अगले निरीक्षण में यह सब चुस्त दुरुस्त मिलना चाहिए। निरीक्षण के दौरान प्रभारी सहायक अभियंता राकेश कुमार, जेई रामकुमार त्रिपाठी, लेखाकार नरेंद्र कुमार शर्मा सहित स्टाफ उपस्थित रहा।
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अविश्वास प्रस्ताव में सरिता को मिली थी सत्ता
जिला पंचायत का पांच वर्षीय कार्यकाल दो अध्यक्षों के बीच गुजरा। आरक्षण में ये सीट महिला के लिए आरक्षित थी। वर्ष 2016 में 30 सदस्यों वाले सदन में बिसंडा के वार्ड 18 से जिला पंचायत सदस्य सपा की निर्मला सिंह 30 में 25 सदस्यों का समर्थन प्राप्त कर अध्यक्ष चुनी गईं थीं। उनकी प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी कैलशिया देवी को महज पांच वोट मिले थे।
प्रदेश में सत्ता बदली तो जिला पंचायत की राजनीति ने भी करवट ली। दो साल बाद ही अविश्वास प्रस्ताव पारित होने से सपा की निर्मला का पत्ता साफ हो गया। भाजपा विधायक प्रकाश द्विवेदी की पत्नी सरिता द्विवेदी को अध्यक्ष पद पर चुन लिया गया। 30 में मात्र 21 सदस्यों ने वोट डाले। नौ सदस्यों ने मतदान नहीं किया। आलम यह रहा कि सपा के साथ रहे सात सदस्य भी भाजपा के पाले में चले गए।
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