मृतक नत्थू की पत्नी व बच्चों से बातचीत करते डीएम योगेश कुमार।
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बांदा। दलित नत्थू की मौत की खबर प्रमुखता से छापकर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव सहित आम पाठकों तक पहुंचाना बांदा के जिला प्रशासन को नागवार गुजरा। सीएम ने तो मृतक के आश्रितों की मदद कर हमदर्दी दिखाई, लेकिन डीएम ने खबर को दुष्प्रचार बताते हुए अफसोस जताया है।
रविवार को मूंगुस पुरवा में दलित नत्थू की आकस्मिक मौत हो गई थी। उसके परिजनों ने बताया था कि चार दिनों से घर में चूल्हा नहीं जला। भूखा नत्थू डेढ़ किलोमीटर दूर ऐला गांव राशन लेने जा रहा था। रास्ते में हैंडपंप में पानी पीते ही उसकी मौत हो गई। खाली पेट पानी पी लेने से मौत की संभावना डाक्टरों ने भी जताई। यानी मौत ‘भूखजनित’ थी।
‘अमर उजाला’ ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। बाद में अन्य मीडिया और चैनलों में भी प्रकाशित और प्रसारित किया। खबर का असर सीएम अखिलेश यादव पर इस रूप में हुआ कि उन्होंने हमदर्दी जताते हुए आश्रितों को पांच लाख रुपये दिए जाने की घोषणा कर दी। उधर, मुख्य सचिव आलोक रंजन ने यहां के डीएम से इस मामले मेें 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट तलब कर ली। खबर भी बृहस्पतिवार को ‘अमर उजाला’ के पेज 1 पर प्रकाशित हुईं।
उधर, डीएम योगेश कुमार ने बृहस्पतिवार को अपने व्हाट्अप ग्रुप में डाले मैसेज में लिखा कि उन्हें ‘अमर उजाला जैसे जिम्मेदार दैनिक समाचार पत्र की खबर पर बेहद अफसोस है। इससे मैं आहत हुआ हूं’। डीएम ने यह भी किया कि सक्षम अधिकारियों का पक्ष भी नहीं लिया गया, जबकि अमर उजाला ने दोनों खबरों में खुद डीएम का वर्जन प्रकाशित किया।