पहले सीडीओ, फिर सांसद और अब डीएम को भी आना पड़ा अपने गोद लिए गांवों में। गोद लेने की घोषणा के बाद पिछले कीरब छह महीने से ये अफसर और जनप्रतिनिधि इन गांवों में नहीं गए थे। न ही गांवों की हालत बदली।
‘अमर उजाला’ में गोद लिए गांवों की खबरें छपने के बाद सीडीओ राममणि त्रिपाठी पुकारी गांव और सांसद कटरा-कालिंजर गांव तुरत-फुरत पहुंच गए। शुक्रवार की शाम डीएम सुरेश कुमार भी अपने गोद लिए गांव बरसड़ा बुजुर्ग पहुंचे और लगे हाथ 250 किसानों को नौ लाख रुपये आपदा राहत राशि के चेक बांट दिए। हालांकि अधिकांश चेक 800 से लेकर हजार रुपये के हैं। किसान इससे संतुष्ट नहीं है।
महुआ ब्लाक के बरसड़ा बुजुर्ग गांव में फसलों की बर्बादी के बाद हर घर में भोजन तक के लाले हैं। यहां ज्यादातर तीन-चार बीघे के छिटपुट किसान हैं। इतनी जमीन में ही किसान अपने साल भर का खर्च चलाते रहे हैँ। लेकिन इस साल कुदरत ने यह भी छीन लिया।
भूसा के लिए किसान गेहूं की फसल बटोर रहे हैं। नौ माह पहले जिलाधिकारी ने इस गांव को गोद लिया था। लेकिन वह खुद गांव नहीं पहुंचे। एडीएम और एसडीएम करीब डेढ़ माह पहले स्कूल में चौपाल लगाकर ग्रामीणों को मदद दिलाने का भरोसा दे आए थे।
रविवार को ‘अमर उजाला’ ने खबर छापकर डीएम को याद दिलाया। शुक्रवार को डीएम यहां आ गए। प्राथमिक विद्यालय में चौपाल लगाई। किसानों की समस्याएं सुनीं। अपने साथ आए अधिकारियों को निर्देश दिया कि यहां बराबर निगाह रखें। यह बात अलग है कि यहां के किसान अभी भी खुश नहीं है।
हलका लेखपाल रमेश गुप्ता ने अपनी बचत के लिए डीएम के हाथों 10 हजार रुपये से ज्यादा वाले कुछ चेक किसानों को बंटवाए। बाद में 800 और 1500 जैसी छोटी रकम के चेक दिए गए। किसान रामप्रताप को 12 बीघा में 3110 रुपये, चंद्रभान को तीन बीघा में 2800, अच्छेलाल को एक बीघा में सिर्फ एक हजार रुपये, छोटा को छह बीघे में साढ़े छह हजार, शिव प्रसाद को साढ़े चार बीघे में सिर्फ 2600 का चेक दिया गया गया है। इनमें भी कई के नाम गलत हैं। किसानों ने बताया कि लेखपाल गांव में जहां उठता बैठता है, उनके चेक 10-12 हजार रुपये के हैं।