बांदा। कोहरे और ठंड के बीच शनिवार को आयोजित दिव्यांग मेले में भीड़ उमड़ी। बाबूलाल चौराहे के पास स्थित आदर्श बजरंग इंटर कॉलेज में आयोजित मेले में 545 दिव्यांगों ने परीक्षण कराया, जबकि 327 दिव्यांगों का एल्मिको की टीम ने परीक्षण कर उन्हें आवश्यक उपकरण के लिए चयनित किया। इसके अलावा प्रशासन के अधिकारियों के सहयोग से मेले के दौरान ही दिव्यांगों के और आय और दिव्यांग प्रमाणपत्र भी बनाए गए। शाम तक मेले में दिव्यांगों की भीड़ जुटी रही। सुबह निर्धारित समय से पहले ही दिव्यांगों की भीड़ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने लगी।
कोई दिव्यांग किसी अपने के कंधे पर तो कोई ई-रिक्शा और कोई बैसाखी के सहारे मेले तक पहुंचा, लेकिन जब लौटे तो उनकी आंखों में जिंदगी का सहारा (उपकरण) पाने की चमक भी दिखाई दे रही थी। मेले में दिव्यांगों की मदद के लिए अलग-अलग काउंटर भी बनाए गए थे। इनमें रजिस्ट्रेशन से लेकर प्रमाणपत्र बनाने तक का काम किया जा रहा था।
इसके अलावा परीक्षण के लिए अलग काउंटर लगा रहा, जिसमें शाम तक दिव्यांगों की लाइन लगी रही। एल्मिको की टीम ने 218 दिव्यांगों का ऑफ लाइन और 109 लोगों का ऑनलाइन परीक्षण किया।
इसके आठ से 10 दिव्यांगों का कृत्रिम अंगों के लिए परीक्षण किया गया। मेले में जिन दिव्यांगों के पास जरूरी कागजात नहीं थे, उनकी भी भरपूर मदद की गई। करीब 50 दिव्यांगों के आय और 90 के दिव्यांग प्रमाणपत्र मौके पर बनवाकर उन्हें परीक्षण के लिए तैयार किया गया। एडीएम वित्त राजेश कुमार, एडीएम नमामि गंगे एमपी सिंह और नगर पालिका अध्यक्ष मालती बासू ने मंच संभाल कर दिव्यांगों का परीक्षण कराने में उत्साह दिखाया। जिला विकलांग कल्याण सशक्तिकरण अभिषेक चौधरी और कॉलेज प्रधानाचार्य मेजर मिथलेश पांडे भी दिव्यांगों के मददगार बने।
मदद में तत्पर दिखे एनसीसी कैडेट्स
मेले में एनसीसी कैडे्टस का उत्साह भी देखते ही बन रहा था। कॉलेज गेट में प्रवेश करते ही दिव्यांगों की मदद करने के लिए कैडेट्स में होड़ सी रही। समीर सिंह, रोहित साहू, कमलेश यादव, शिवम सिंह, पीयूष सिंह, अखिलेश, सुधीर, आकाश आदि कैडे्टस में किसी ने दिव्यांगों को अपनी गोद में उठाया तो किसी ने कंधा पकड़ा स्टॉल तक पहुंचाने का काम किया।
दिव्यांगों की बात,,,,
सहारा मिलने की उम्मीद तो जगी
मुरवा गांव से आई हीरामनी ने बताया कि जब उन्हें मेले के बारे में पता लगा तो एक बार ख्याल आया कि वहां कैसे परीक्षण हो सकेगा, लेकिन यहां आकर इतनी सुविधाजनक परीक्षण हुआ कि इसकी उम्मीद ही नहीं थी। इसी तरह कमासिन के दिव्यांग रमाशंकर का कहना है कि पंजीकरण के बाद एक आस जगी है कि उपकरण मिलने से बाकी की जिंदगी आराम से गुजर जाएगी।