बांदा। सूखे की मार झेल रहे चित्रकूटधाम मंडल के किसानों के लिए सरकारी और
निजी नलकूप भी मददगार नहीं साबित हो रहे हैं। कहीं ट्रांसफार्मर तो कहीं
मोटरों की खराबी से नलकूप ठप हैं।
धूप में सूख रही धान व खरीफ की
फसल को बचाने की जद्दोजहद में जुटे किसान बिजली व नलकूप विभाग के चक्कर काट
रहे हैं। मंडल में 1113 राजकीय नलकूपों में 37 स्थाई रूप से खराब हैं,
जबकि 40 में मोटर की मरम्मत और ट्रांसफार्मर बदलने का इंतजार है। इसी तरह
670 निजी नलकूपों के ट्रांसफार्मर खराब पड़े हैं।
चित्रकूटधाम
मंडल में बांदा और हमीरपुर में 40 फीसदी फसलों की सिंचाई नलकूपों पर ही
आश्रित है। इन दोनों जिलों में हरेक जनपद में 545 राजकीय नलकूप हैं। महोबा
में सिर्फ दो और चित्रकूट में 21 राजकीय नलकूप हैं। खराब नलकूपों को
दुरुस्त कराने के लिए नलकूप व बिजली विभाग में किसानों के शिकायतीपत्रों की
भरमार है।
तहसील दिवसों में भी नलकूप की खराबी की ज्यादातर
शिकायतें आ रही हैं। कृषि विभाग के मुताबिक नलकूप विभाग से भेजी गई सूची
में मंडल में कुल 77 राजकीय नलकूप बंद हैं।
इनमें 37 नलकूप स्थाई
रूप से बंद हैं, जबकि 28 विद्युत दोष व 12 यांत्रिक खराबी से ठप हैं। बांदा
में 13 राजकीय नलकूपों में ट्रांसफार्मरों की दरकार है। हमीरपुर में 15
में ट्रांसफार्मर बदलने के लिए किसान चक्कर लगा रहे हैं।
कृषि
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक मंडल में 16590 किसानों के निजी बोरिंग
(नलकूप) हैं। इनमें 10 हजार से ज्यादा बिजली विभाग के ट्रांसफार्मरों से चल
रहे हैं। इनमेें 670 नलकूपों के किसानों ने ट्रांसफार्मर बदलने के लिए
अर्जी दे रखी है।
इनमें से माह भर में सिर्फ 160 ट्रांसफार्मर बदले
गए हैं। किसानों का कहना है कि बिजली विभाग के पास 40, 60 व 100 केवीए
ट्रांसफार्मर की कमी है। ज्यादा पैसा खर्च करने वालों के यहां ट्रांसफार्मर
तुरंत बदल जाते हैं, लेकिन अन्य किसानों को दौड़ाया जा रहा है।
राजकीय
नलकूपों की मरम्मत व ट्रांसफार्मर बदलने के लिए विभागीय अधिकारियों को
लिखा गया है। शासन-प्रशासन को भी रिपोर्ट भेजी गई है। मंडलायुक्त ने खराब
राजकीय नलकूपों को शीघ्र दुरुस्त कराने के निर्देश दिए हैं।
-डॉ. पंकज त्रिपाठी, संयुक्त कृषि निदेशक, चित्रकूटधाम मंडल।