बांदा। एक साथ मनाए जा रहे नवरात्र और मोहर्रम शहर में सौहार्द और बढ़ा रहे हैं। रोजाना ऐसे सुखद और प्रेरणादायक दृश्य नजर आ रहे हैं, जिनसे अन्य शहरों को भी सबक लेना चाहिए। शुक्रवार को रात मोहर्रम की पांचवीं पर शहर में जगह-जगह ढालों के जुलूस (जत्थे) निकले। देवी पंडालों से यह ढालें गुजरीं तो पंडालों की रोशनी में और जगमगा उठीं। देवी प्रतिमाओं के सामने कुछ देर ढालों को रोका भी गया।
देवी भक्त और शहीदाने कर्बला के अकीदतमंद एक साथ हो गए। कुछ स्थानों पर एक दूसरे के सम्मान में पंडालों में बज रहे डीजे बंद कर दिए गए तो कहीं ढालों के ढोल-ताशे थम गए। इस अवसर पर मोहर्रम कमेटी और केंद्रीय दुर्गा पूजा महोत्सव समिति दोनों के ही पदाधिकारी उपस्थित रहे। मोहर्रम कमेटी में संरक्षक मोहम्मद शोएब, अध्यक्ष अब्दुल वहीद, सपा पूर्व अध्यक्ष इमरान अली राजू, मोहम्मद अजीज उर्फ अज्जन, वाजिद अली, अंसार सिद्दीकी के अलावा शहर काजी मौलाना अकील मियां भी पांचवीं के मेले में उपस्थित थे।
उधर, दुर्गा मोहत्सव समिति के अमित सेठ भोलू, अभिषेक पांडेय, लव सिन्हा, राजन रावत, शंभू धुरिया उपस्थित रहे। कोतवाली प्रभारी केपी सिंह और मर्दननाका चौकी इंचार्ज भी मौजूद थे।
उधर, नवरात्र की सप्तमी पर शनिवार को मुस्लिमों में शहर के मुख्य महेश्वरी देवी मंदिर में श्रद्धालुआें को लंगर के रूप में पांच कुंतल लौकी का हलुवा बांटा। बसपा नेता मुमताज अली की अगुवाई में देर शाम तक हलुवा बंटता रहा। शाहिद निजामी, शराफत हुसैन (तिंदवारा), खुर्शीद (हथौरा), शमशेर, अरशद अली, इरशाद अहमद सहित संजय त्रिवेदी, ओम प्रकाश गुप्ता, पूर्व प्रधानाचार्य बाबूलाल गुप्त, जेपी वर्मा आदि शामिल रहे।