बांदा। सूखे बुंदेलखंड में सरकार की ओर से पशुओं के लिए मुफ्त भूसा बांटे जाने की योजना में भी अफसरों ने खेल कर दिया। शासन को भेजी गई रिपोर्ट में औसतन प्रति पशु 13 किलो भूसा दिए जाने का जिक्र है लेकिन तहसीलदार की मानें तो बड़े पशु के लिए पांच किलो और छोटे पशु के लिए तीन किलो भूसा ही बांटा गया है। अफसरों के मुताबिक पूरे चित्रकूटधाम मंडल के 266068 पशुओं को 37171 क्विंटल से ज्यादा भूसा बांटा गया है। हकीकत यह है मंडल के हर जिले के गांवों से पशुपालकों के यही स्वर सुनाई पड़ रहे हैं कि उन्हें भूसा नहीं मिला। मवेशी भूख से मर रहे हैं। प्राकृतिक आपदा के चलते पिछले साल खरीफ और रबी की फसल में न तो अनाज पैदा हुआ और न ही चारा। मवेशियों के भूखे मरने की नौबत आ गई। प्रदेश सरकार ने पशुओं के भूसा के लिए बुंदेलखंड के सभी जिलों को एक-एक करोड़ रुपये भूसा खरीदने और बांटने के लिए दिए गए थे। हर दिन गांवों से भूसा की हाहाकार की खबरें मिलतीं रहीं। यह सिलसिला अभी भी जारी है। दूसरी तरफ मंडल के चारों जिलों का प्रशासन मवेशियों को भूसा परोसने के बजाय खुद के तैयार भूसा वितरण के आंकड़े सरकार और आम लोगों को परोस रहा है। इसकी ताजी बानगी इसी हफ्ते चारों जिलों के प्रशासन द्वारा मुख्य सचिव के लिए तैयार की गई रिपोर्ट है।
भूसा वितरण के जो आंकड़े सरकार को दिए गए हैं उनमें बांदा जिले मेें 9344 पशुओं को 9690.65 क्विंटल, चित्रकूट मेें 122777 पशुओं को 11099 क्विंटल, हमीरपुर में 48485 पशुओं को 7278.2 क्विंटल और महोबा जिले के 85462 मवेशियों को 9104.10 क्विंटल भूसा बांटा जा चुका है
हकीकत से परे है रिपोर्ट
बांदा। मुख्य सचिव को भेजी रिपोर्ट और अफसरों द्वारा दी गई जानकारी में भारी अंतर है। चारों जिलों में भूसा वितरण की भेजी गई रिपोर्ट में जहां प्रति पशु भूसे का औसत करीब 13 किलो आ रहा है, वहीं अधिकारी मात्र पांच या तीन किलो की दर से भूसा बांटना बता रहे हैं। 266068 पशुओं के बीच 37171.95 क्विंटल भूसा बांटने का प्रशासन ने दावा किया है। इस हिसाब से मंडल के प्रत्येक पशु के हिस्से में 13 किलो भूसा आया लेकिन अफसरों व कर्मचारियों ने चंद मुट्ठी भूसा देकर पशुपालकों को चलता कर दिया। नरैनी क्षेत्र के तहसीलदार राजेंद्र मिश्रा ने बताया कि बड़े पशु को पांच किलो और छोटे पशु को तीन किलो की दर से भूसा बांटा गया है।
गो शालाओं को चारा की बातें झूठी
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में अन्ना पशुओं की भरमार है। इनके लिए पशुपालन विभाग पूरे मंडल में 96 पशु राहत कैंप का दावा कर रहा है। मुफ्त भूसा देने की बात कही जा रही है लेकिन ये दावे भी झूठे हैं। दूरस्थ गांवों की कौन कहे? बांदा शहर से मात्र पांच किलोमीटर दूर बड़ोखर खुर्द गांव मेें प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह के निर्देशन में चल रहे निजी गो शाला (काऊ गेस्ट हाउस) को चार माह से ज्यादा बीत गए। यहां दो सौ से ज्यादा अन्ना गायें हैं। प्रशासन ने यहां भूसे का तिनका भी नहीं दिया।