इस बार मकर संक्रांति परिजात योग के साथ मनाई जा रही है। त्रयोदशी जैसा महासंयोग भी है। मान्यता है कि इसमें किया गया दान कई गुना फलदाई होता है। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रविवार को मकर संक्रांति मनाई। सोमवार को भी यह पर्व मनाया जाएगा। नदी-सरोवरों में श्रद्धालुओं का मेला रहा। पूजा-अर्चना के बाद ब्राह्मणों व गरीबों को दान-दक्षिणा और खिचड़ी बांटी।
केन नदी घाटों में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। नदी में डुबकी लगाने के बाद मंदिरों के बाहर गरीबों को खिचड़ी बांटी। संकट मोचन, महेश्वरी देवी, बांबेश्वर, कालीदेवी, सिंहवाहिनी, कटरा शिव मंदिर में भक्तों ने पूजा-अर्चना की और खिचड़ी व तिल के लड्डू चढ़ाए। उधर, चिल्ला तट पर यमुना-केन संगम पर बांदा व सीमावर्ती फतेहपुर जिले के गांवों से आए श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना की। यह क्रम दिनभर चला।
बबेरू में यमुना नदी औगासी, मरका घाट और सिमौनी गड़रा नदी में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। गरीबों को खिचड़ी बांटी और पुरोहितों को दक्षिणा दी। मढ़ीदाई मंदिर में दिनभर आस्थावानों की भीड़ रही। अतर्रा में गौरा बाबाधाम और गिरवां में विंध्यवासिनी मंदिर व भूतेश्वरनाथ में आस्थावानों ने पूजा-अर्चना की।
नरैनी में बरूवा स्योढ़ा के रामचंद्र पहाड़ और शिवपुर के रनगढ़ किला घाट पर स्नान कर श्रद्धालुओं ने सूर्यदेव को अर्घ्य देते हुए खिचड़ी दान की। रनगढ़ घाट पर सीमावर्ती मध्य प्रदेश के श्रद्धालुओं की भी भीड़ रही। रामचंद्र पहाड़ पर मेला में क्षेत्रीय लोगों की भीड़ रही। कालिंजर में ऐतिहासिक दुर्ग में कोटि तीर्थ, रामकटोरा, बुड्ढा-बुड्ढी तालाबों में हजारों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर नीलकंठेश्वर मंदिर में शंकर और पार्वती की पूजा-अर्चना की। दुर्ग में मेले जैसा नजारा रहा। दुर्ग के नीचे भी मेला लगा। उधर, बदौसा, कमासिन, तिंदवारी, बिसंडा, खप्टिहा कलां, जसपुरा, पैलानी समेत गांवों व कसबों में मकर संक्रांति धूमधाम से मनाई गई।