बांदा। लॉकडाउन में सरकारी व्यवस्थाएं खरी नहीं साबित हो रही। शासन से लेकर प्रशासन द्वारा प्रचारित सुविधाएं नाममात्र की हैं। अव्यवस्थाएं ज्यादा हावी हैं। महानगरों से लौटे मजदूरों के लिए खोले गए क्वारंटीन सेंटरों में पर्याप्त खाना-पानी, बिजली, सफाई इत्यादि नहीं है। नतीजे में सैकड़ों किलोमीटर पैदल सफर तय कर आए थके-मांदे मजदूर यहां बीमार हो रहे हैं।
शुक्रवार को ऐसे ही 59 मजदूरों को क्वारंटीन सेंटर से जिला अस्पताल लाया गया। उधर, राशन की दुकानें मंडल मुख्यालय में ही पूरे समय नहीं खुल रहीं। मुख्यालय की सफाई व्यवस्था में कोई सुधार या बढ़ोत्तरी नहीं की गई है।
लॉकडाउन हुए 10 दिन बीत गए। शासन ने जो सुविधाएं और रियायतें घोषित की हैं वह पर्याप्त हैं। बशर्ते उन पर अमल हो जाए। घरों में कैद होकर रह गए लोगों को राशन और रोजमर्रा की चीजों के लिए जूझना पड़ रहा है। होम डिलीवरी सिर्फ खानापूरी है। सब्जी से लेकर खाने की सभी वस्तुएं ऊंचे दामों पर बिक रही हैं। मुख्यालय में अधिकारी और पुलिस का पूरा ध्यान सिर्फ सड़कों पर जमघट लगाने वालों को खदेडने और डंडे चलाने तक सीमित है।
क्वारंटीन सेंटर भी बदहाल हैं। शुक्रवार को पैलानी, जसपुरा, मटौंध, चिल्ला, बबेरू आदि में खोले गए क्वारंटीन सेंटरों में बीमार पड़ गए 59 मजदूरों को जिला अस्पताल लाया गया। यहां इनका इलाज हुआ।
सभी प्राइवेट अस्पताल बंद होने से बीमारों को भारी असुविधा हो रही है। इन अस्पतालों की ओपीडी बंद है। डाक्टरों का कहना है कि उन्हें सुरक्षा और सुविधाएं नहीं मिल रहीं। जिला अस्पताल में ओपीडी सेवा बंद है। गंभीर मरीजों को न तो इलाज मिल रहा है, न ही बाहर ले जाने के लिए वाहन की सुविधा।
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आइसोलेशन के मरीजों को टंकी का गरम पानी
बांदा। राजकीय मेडिकल कालेज में कोविड-19 के संभावित मरीजों के लिए बनाए गए विशेष आइसोलेशन वार्ड में भी अव्यवस्थाएं हैं। यहां भर्ती मरीजों को पीने के पानी तक के लाले हैं। उन्हें घर से पानी आदि मंगाने की अनुमति नहीं है।
मरीजों ने बताया कि वार्ड के शौचालय आदि के इस्तेमाल को ऊपर छतों में रखी गई टंकियों का धूप से गर्म हो गया पानी पीना पड़ रहा है। बाहर या घर से सीलबंद पानी की बोतल मंगाने की अनुमति नहीं है। ऐसे में भले ही यहां भर्ती लोगों को कोरोना से क्लीनचिट मिल जाए। लेकिन गर्म और दूषित पानी व अव्यवस्थाओं से बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।
उधर, इस बाबत मेडिकल कालेज प्रधानाचार्य डा.मुकेश कुमार यादव का कहना है कि बाहर से पानी मंगाना जोखिम भरा और खतरे से खाली नहीं है। कोई भी प्रदूषित पानी आ जाने से इन संवेदनशील और संदिग्ध मरीजों को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि वह शुद्ध और ठंडे पेयजल की व्यवस्था कराएंगे।