इमरजेंसी वार्ड के बरामदे में कूड़े-कचरे की बाल्टी, झाड़ू और नजदीक में तीमारदार।
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बांदा। डेंगू और बुखार के मरीजों की भरमार के बाद भी जिला अस्पताल में साफ सफाई नहीं है। अस्पताल परिसर की तो बात दरकिनार इमरजेंसी वार्ड के बरामदे में मरीजों और तीमारदारों के नजदीक झाड़ू और कूड़े कचरे की बाल्टी रखी है। इस वार्ड के शौचालय स्त्री और पुरुषों के लिए एक साथ हैं। उधर, डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के इलाज और जांच की मांग को लेकर मंडल के भाजपाइयों ने सीएम को ज्ञापन भेजा है।
इन दिनों डेंगू और मौसमी बीमारियों के चलते प्रदेश सरकार ने भी एलर्ट जारी कर रखा है। अस्पतालों में सफाई और दवाओं की उपलब्धता आदि के मुख्यमंत्री तथा स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव और महानिदेशक ने आदेश दे रखे हैं, लेकिन जिला अस्पताल में यह सब नजर नहीं आ रहा। हालांकि पहले से सफाई पर ध्यान तो दिया गया है लेकिन यह अभी भी नाकाफी है। अस्पताल परिसर में बन रहे नए भवन की वजह से आसपास जलभराव और गंदगी है। डस्टबिन कूड़े से भरे रहते हैं।
पलंगों की चादरें गंदी रहती हैं। इमरजेंसी वार्ड के बरामदे में डस्टबिन (कचरे की बाल्टी) और स्वीपर की झाड़ू रखी जा रही है। इसके इर्दगिर्द मरीज और तीमारदार रहते हैं। डेंगू वार्ड तक दुर्गंध पहुंच रही है। पुरुष अस्पताल में गुरुवार को भी मरीजों की भीड़ रही। ओपीडी में 927 मरीज देखे गए। आधा सैकड़ा 50 मरीजों को भर्ती किया गया। इनमें ज्यादातर बुखार के थे।