बांदा। मेडिकल कालेज को मेडिकल कौंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) की मान्यता लेने के लिए प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह जुटा है। एमसीआई टीम की नजर में आई खामियों दूर करने की कवायद चल रही हैं। शनिवार को एक बार फिर प्रदेश के स्वास्थ्य महानिदेशक ने खुद आकर तैयारियों का जायजा लिया। एमसीआई टीम जल्द ही दोबारा आने वाली है।
इस वर्ष की शुरुआत मेें एमसीआई टीम ने यहां मेडिकल कालेज का निरीक्षण कर तमाम कमियां पाई थीं।
उन्हें दूर करने के बाद ही मान्यता के लिए संस्तुति करने का आश्वासन दिया था। तीन महीनों में स्वास्थ्य विभाग ने इन कमियों को काफी हद तक दूर किया है। ताकि मान्यता लेकर इसी सत्र से एमबीबीएस कक्षाएं शुरू की जा सकें। एमसीआई टीम ने तीन मुख्य शर्तें बताई थीं। इन्हें लगभग पूरा कर लिया गया है। इसी का जायजा लेने के लिए शनिवार को यहां प्रदेश के स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा के महानिदेशक डॉ. वीएन त्रिपाठी मेडिकल कालेज आए। वह पहले भी कई बार आ चुके हैं। उनके साथ रिटर्नी प्रो. डॉ. नरेश यादव भी थे। दोनों ने देर तक पूरे मेडिकल कालेज का निरीक्षण किया। एमसीआई की द्वारा बताई गई शर्तों को खासतौर से देखा।
बिना ड्रेस के ड्यूटी कर रहे डाक्टरों और कर्मचारियों को चेतावनी दी। एक्सरे और अल्ट्रा साउंड मशीनें चलवाकर देखीं। औषधि वितरण व भंडार कक्ष, आपरेशन थ्रेयटर, कैंसर रोग विभाग के साथ डाक्टरों के कक्ष, वार्ड आदि देखे। प्रधानाचार्य डॉ. सुनील कुमार आर्या ने उन्हें पूरी जानकारी दी। डॉ. आरसी अरुण, डॉ. शिशिर चतुर्वेदी, डॉ. करन राजपूत, डॉ. भूपेंद्र आदि इस अवसर पर उपस्थित रहे।
बहरेपन का भी इलाज शुरू
बांदा। मेडिकल कालेज में एक और चिकित्सा विभाग शुरू हो गया। अब यहां बहरेपन की भी जांच और इलाज होगा। रविवार को महानिदेशक ने इसकी औपचारिक शुरुआत कराई। प्राचार्य डॉ. एसके आर्य ने बताया कि बहरेपन की जांच के लिए आधुनिक मशीन आडियोमीटर लगाई है। यह उपकरण मात्र गोरखपुर में उपलब्ध है। इसके लिए साउंडप्रूफ कक्ष बनाया गया है।
इसी वर्ष शुरू होंगी एमबीबीएस कक्षाएं
बांदा। प्रदेश के स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ. वीएन त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश सरकार की मंशा के मुताबिक यहां मेडिकल कालेज में एमबीबीएस कक्षाएं इसी सत्र में शुरू हो जाएंगी। फिलहाल 100 सीटों से शुरुआत होगी। महानिदेशक ने बताया कि एमसीआई की मान्यता के बाद यह कक्षाएं चालू होनी है। पूरी उम्मीद जताई की इसी वर्ष मान्यता मिल जाएगी। मानक के मुताबिक सभी शर्तें पूरी कर ली गई हैं। अलग-अलग विभागवार डाक्टर और स्टाफ है। ओपीडी में रोजाना लगभग 700 मरीजों की आमद हो रही है।