बीती पांच नवंबर को कालूकुआं मोहल्ला निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक से साइबर ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया था। ड्रग्स तस्करी में फंसाने की धमकी देकर उन्हें करीब 10 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और डराकर 36 लाख रुपये ठग लिए थे।
हालांकि बैंक की सजगता और साइबर थाने की तत्परता से रकम वापस कराई जा सकी। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने जिस खाते में धनराशि भेजी गई थी, उसकी पड़ताल में पाया कि वह खाता हैदराबाद की एक ऑटोमोबाइल सर्विस एजेंसी के नाम पर है। अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज ने बताया कि सर्विस सेंटर के मालिक और कर्मचारियों से संपर्क किया जा रहा है।
संदेह है कि इस खाते का इस्तेमाल किसी गिरोह ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए या फिशिंग लिंक से एक्सेस कर किया हो। वहीं पुलिस तकनीकी साक्ष्य जुटा रही है। साइबर टीम ट्रांजेक्शन की रूटिंग, आईपी एड्रेस और सर्वर लोकेशन की मदद से गिरोह के सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
प्रारंभिक संकेतों से पता चला है कि गिरोह दक्षिण भारत के राज्यों से सक्रिय है और देशभर में बुजुर्ग व सेवानिवृत्त लोगों को निशाना बना रहा है। एएसपी शिवराज का कहना है कि जल्द ही इस गिरोह के तार पूरी तरह सुलझा लिए जाएंगे और साइबर अपराधियों के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई नजीर बनेगी।