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छह बाद भी रिकवरी न होने से उपायुक्त खफा

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बांदा। मनरेगा से कराए गए कार्यों में टीएसी जांच के बाद 77,537 रुपये के उजागर हुए घोटाले की रकम छह माह बाद भी वसूले न जाने पर उपायुक्त (श्रम एवं मनरेगा) ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी पाए गए कर्मचारियों और दो ग्राम प्रधानों का वेतन/मानदेय तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही एक हफ्ते के अंदर वसूली के निर्देश दिए हैं।
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मुख्य प्राविधिक परीक्षक एपेक्स तकनीकी प्रकोष्ठ (टीएसी) लखनऊ ने मार्च में बबेरू ब्लाक के निभौर और बिसंडा ब्लाक के पवइया गांव की जांच की थी। निभौर में खड़ंजा निर्माण में 19,448 रुपये का घोटाला पकड़ा था। यहां ग्राम प्रधान इंद्रकली सिंह, ग्राम विकास अधिकारी कमलेश सिंह और तकनीकी सहायक सुरेश सिंह से घोटाले की यह रकम प्रत्येक 6483 रुपये के हिसाब से वसूलने के आदेश दिए गए हैं। इसी तरह पवइया में दो संपर्क मार्गों में मिट्टी के कार्य में हुए 26,696 और 31,393 रुपये (कुल 58,089 रुपये) का घोटाला पकड़ा गया था।
यहां ग्राम प्रधान रामखिलावन, ग्राम विकास अधिकारी महेश कुमार, तकनीकी सहायक मुबीन जैदी को दोषी पाते हुए इन सभी से घोटाले की राशि बराबर-बराबर अंश के रूप में वसूलने के आदेश दिए गए थे।
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दोषियों से अभी तक घोटाले की रकम वसूल नहीं हुई। इस पर उपायुक्त (श्रम रोजगार) ने शुक्रवार को बबेरू ब्लाक के खंड विकास अधिकारी प्रभात कुमार द्विवेदी और बिसंडा ब्लाक के खंड विकास अधिकारी मनोज कुमार सिंह को जारी पत्रों में कहा है कि छह माह बाद भी दोनों बीडीओ के स्तर से कार्रवाई न होना उनकी उदासीनता का परिचायक है। दोनों बीडीओ को निर्देश दिया है कि तत्काल वसूली करके आख्या दें। धनराशि जमा नहीं की जा रही तो दोषियों का वेतन/मानदेय अग्रिम आदेशों तक रोककर इनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करें।
डीएम ने दिए जांच के आदेश
बांदा। बिसंडा विकास खंड के ग्राम पंचायत बीरी बिरहंड में कराए गए विकास कार्यों की जांच दो सदस्यीय समिति करेंगी। डीएम हीरालाल ने ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अधिशासी अभियंता निर्माण खंड-प्रथम व सहायक अभियंता जिला ग्राम्य विकास अभिकरण को संयुक्त रूप से एक सप्ताह के अंदर जांच कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। आदेशों में कहा कि जांच में प्रत्येक बिंदु की बारीकी से जांच कर दुरुपयोग की गई धनराशि का उल्लेख किया जाए।
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