आर्थिक तंगी, जागरूकता की कमी और अव्यवस्थित दिनचर्या
के कारण बुंदेलखंड में मानसिक रोगी बढ़ रहे हैं। यहां सबसे ज्यादा
आत्महत्याओं की वजह भी यही है। ये बातें मानसिक रोग विभाग के मेडिकल आफीसर
डॉ. हरदयाल ने कही।
विश्व अल्जाइमर्स दिवस के मौके पर 21 से 27
सितंबर तक राष्ट्रीय डिमेंशिया जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। शुक्रवार
को जिला अस्पताल में मानसिक रोग विभाग के तत्वावधान में आयोजित गोष्ठी में
डॉ. हरदयाल ने कहा कि आर्थिक तंगी से मानसिक अवसाद पैदा होता है।
मानसिक
रोगों में डिमेंशिया महामारी का रूप ले रहा है। इसके प्रति हम सब लोगों को
जागरूक होना होगा। डिमेंशिया भूलने व याददाश्त कमजोर करने वाली बीमारी है।
ऐसे रोगियों से झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़कर जिला अस्पताल में नि:शुल्क
इलाज कराने की अपील की।
साइकोलाजिस्ट डॉ. रिजवाना हाशमी ने कहा कि
डिमेंशिया वृद्धावस्था में होने वाली गंभीर बीमारी है। उन्होंने कहा कि
ऐसे मरीजों से स्नेह से पेश आएं। पौष्टिक भोजन दें और उनके उचित देखभाल
करें।
सामाजिक कार्यकर्ता नंदिनी कुरील, नरेंद्र कुमार मिश्रा,
कीर्ति प्रभा पाल, स्टाफ नर्स त्रिभुवन नाथ, अनुपम त्रिपाठी, मेराज अहमद
मौजूद रहे।