जनपद में डेंगू के बढ़ते मामलों और इससे नौ लोगों की मौत की खबरों को प्रदेश सरकार ने संज्ञान में लेते हुए पूरे मामले की जांच कराने की घोषणा की है। प्रदेश के प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) अरुण कुमार सिन्हा ने सोमवार को लखनऊ में यह बात कही। उन्होंने कहा कि डेंगू पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। डेंगू का सबसे ज्यादा प्रकोप बांदा मुख्यालय से मात्र 11 किलोमीटर दूर जमालपुर गांव में है।
यहां अभी तक छह लोगों की इस बीमारी की चपेट में आने से मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में ग्रामीण बुखार की गिरफ्त में हैं। जमालपुर के अलावा सबादा में एक, बबेरू में दो व चित्रकूट में भी दो लोगों की डेंगू से मौत हो चुकी है। जगह-जगह बारिश के जलभराव से मच्छरों की भरमार है। ऐसे में मच्छर जनित रोग डेंगू ने यहां पांव जमा लिए हैं। जिला अस्पताल के डाक्टर झंझट से बचने के लिए भले ही डेंगू न बताएं, लेकिन प्राइवेट पैथालॉजी में हो रही जांचों से डेंगू के कई संभावित मरीज पाए गए हैं।
जिला अस्पताल से उन्हें कानपुर रेफर कर दिया गया। कई की कानपुर में इलाज के दौरान मौत भी हो चुकी है और कुछ लोग अभी भी कानपुर में भर्ती हैं। उधर, जमालपुर गांव में स्वास्थ्य विभाग डाक्टरों की टीम भेजकर दवाएं बांट रहा है। गांव में सफाई और दवाओं का छिड़काव भी हुआ है।
डेंगू से मौतों की आए दिन छप रहीं खबरों ने स्वास्थ्य विभाग का ध्यान भी आकृष्ट किया है। इसकी बानगी सोमवार को सामने आई। सोमवार को लखनऊ सचिवालय में प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) अरुण कुमार सिन्हा ने डेंगू मामले में पत्रकार वार्ता की। इसी दौरान कुछ पत्रकारों ने उनका ध्यान बांदा में फैले डेंगू की ओर आकृष्ट कराया।
इस पर प्रमुख सचिव ने कहा कि वह बांदा में इस प्रकरण की पूरी जांच कराएंगे। लापरवाही पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी। प्रमुख सचिव ने कहा कि डेंगू पर सीएमओ या किसी भी अन्य स्वास्थ्य अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही मिली, तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि डेंगू के नाम पर निजी अस्पताल का गोरखधंधा चलाने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।