बांदा। सूखे बुंदेलखंड में पानी का संकट भयावह हो गया है। गांवों के तालाब और कुएं सूखने और भूजल स्तर नीचे गिरने से हैंडपंप फेल हो गए हैं। नदी किनारे आबाद गांव भी पानी संकट से अछूते नहीं हैं।
लोहिया गांव समेत अधिकांश गांवों के ग्रामीणों को पानी की तलाश में दर-दर भटकना पड़ रहा है। हालत इतनी बदतर है कि कई ग्रामीणों की खुशियों पर पानी फिर गया। लोगों को बेटियों की शादी टालनी पड़ रही है। सदर तहसील क्षेत्र का चटगन गांव इसकी बानगी है।
मई में पानी के लिए मचने वाला हाहाकार अप्रैल में ही शुरू हो गया। जल संकट से जूझ रहे गांवों में पेयजल आपूर्ति ‘भगवान भरोसे’ है। सूखे की मार के साथ ग्रामीणों को अब पानी संकट रुला रहा है। राम मनोहर लोहिया समग्र गांव भी इसकी चपेट में हैं।
शहर मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर केन नदी किनारे आबाद चटगन गांव लोहिया ग्राम है। यहां की आबादी 900 है। एक मात्र नलकूप है। भूजल स्तर नीचे खिसकने से डिस्चार्ज क्षमता कम होने पर ओवरहेड टैंक नहीं भर पाता। इससे पेयजल आपूर्ति प्रभावित है। गांव में चार हैंडपंपों में तीन ठप हो गए। नदी भी इनकी प्यास नहीं बुझा पा रही। नदी का जलस्तर कम होने से पानी कीचड़युक्त है।
मजबूरन ग्रामीणों को तीन किलोमीटर दूर छेहरांव गांव से ट्रैक्टर, बैलगाड़ी व साइकिलों पर पानी ढोना पड़ रहा है। जबरदस्त पानी संकट के चलते कुछ ग्रामीणों ने बेटियों की शादी टाल दी। इनका कहना है कि बारिश होने के बाद पेयजल संकट खत्म होने पर उनके हाथ पीले करेंगे।
पढ़ाई छोड़ बच्चे भी ढो रहे पानी
बांदा। सूखा और पानी संकट का असर परिषदीय स्कूलों पर भी पड़ा है। चटगन गांव के विद्यालय में इन दिनों छात्र संख्या बेहद कम है। स्कूल के छात्र-छात्राएं पढ़ाई छोड़कर घरों में इस्तेमाल के लिए पानी ढो रहे हैं। छात्र राजेश, शिवकरन, दीपक का कहना है कि बारियों से सब्जी तोड़कर शहर में बेचते हैं, जिससे रोटी मिल सके। रात को घर के लिए पानी ढोते हैं। इस कारण पढ़ाई का समय नहीं मिल पाता।