संत बाबा चेतनदास के 43वें निर्वाण दिवस पर शनिवार को सिंधी गुरुद्वारा में भजन संध्या गूंज उठे। सिंधी साधुओं ने संत के जीवन पर चर्चा की। ‘बालक, बूढ़े, जवान कहें, टेऊं सत्संग से तुमरा होए कल्याण’ प्रवचन भी गूंजे।
शिवशांति आश्रम, लखनऊ से आए संत शिरोमणि सांई चांडूराम ने कहा कि हमें संतों और बड़ों की खिदमत (सेवा) निष्काम भावना से करनी चाहिए। जरूरतमंदों की सेवा तन, मन, धन से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन को शुभ कार्यों से सजाएं।
प्रेम प्रकाश आश्रम, कानपुर से आए संत भोला सांई ने कहा कि मनुष्य के सुधार का एक ही सत्संग साधन है। संत समागन आइए बालक, बूढ़े, जवान कहें टेऊं सत्संग से तुमरा होए कल्याण।
भगत अमरलाल ने कहा कि संत बाबा चेतनदास ने अपना सारा जीवन बांदा नगर में परोपकार में बिताया। नित्य सत्संग भजन से वह सबका मन मोह लेते थे। उनकी चेतन भजवावली आज भी भारत में प्रसिद्ध है। समापन गुरुग्रंथ साहिब के पाठ से हुआ। श्रद्धालुओं ने रूमाला चढ़ाया। देश में एकता, अखंडता की कामना के लिए अरदास हुई। अंत में प्रसाद बांटा।