बुंदेलखंड पैकेज से चलाए गए हरित पट्टी अभियान का भी वही हश्र हुआ जो बुंदेलखंड में अन्य योजनाओं का रहा। पैकेज से दस्यु प्रभावित क्षेत्र फतेहगंज के कोल्हुआ जंगल में बनाए गए 55 ड्राई चेकडैम में से ज्यादातर पहली बारिश के पानी में बह गए।
जो बचे वे अपने उद्देश्य को पूरा नहीं करपा रहे। वन विभाग ने इन बांधों के बनवाने में दो करोड़ 68 लाख रुपये खर्च किए थे। आरटीआई कार्यकर्ता ने सूचना लेकर बांधों के नाम पर पैकेज के पैसे से खिलवाड़ का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।
बुंदेलखंड पैकेज से वन विभाग ने जनपद के दस्यु प्रभावित क्षेत्र मेें 55 ड्राई चेकडैम बनवाए। इनमें अधिकतर पहली ही बारिश में बह गए। उनका नामोनिशान नहीं है। जो बचे वे पानी को रोकने में सक्षम नहीं रहे। पैकेज का पैसा पानी मेें बह गया। इन क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों और उनके मवेशियों को चेकडैमों का कोई लाभ नहीं मिला।
इन्हीं क्षेत्रों मेें वन विभाग ने 50 एकड़ जमीन में हरित पट्टी अभियान शुरू किया था। इनमें पहाड़ी क्षेत्र में हजारों पौधे रोपे गए थे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 19 जून 2013 को इस अभियान की शुरूआत की थी। मुख्यमंत्री द्वारा अभियान शुरू किए जाने का शिलापट आज भी नरैनी क्षेत्र के आनंदपुर गांव के पास लगा हुआ है, लेकिन यहां न तो पौधे हैं न चेकडैम।
प्रवास सोसायटी के आशीष सागर ने चेकडैम और हरित पट्टी संबंधी जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम से वन विभाग से हासिल की है। आशीष सागर ने बताया कि चित्रकूटधाम मंडलायुक्त जिस तरह पांच विभागों द्वारा बुंदेलखंड पैकेज से कराए गए कामों की जांच करा रही हैं, उसमें चेकडैम और हरित पट्टी अभियान को भी शामिल किया जाए।
जांच से असलियत सामने आएगी। आशीष सागर ने कहा कि जिलाधिकारी द्वारा बुंदेलखंड पैकेज के कामों की जांच को गठित की गई समितियों में ज्यादातर वही अधिकारी शामिल किए गए हैं, जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं।
भूमि-जल संरक्षण में मंडल में 49 करोड़ खर्च
बुंदेलखंड विकास पैकेज से भूमि एवं जल संरक्षण कामों के नाम पर चित्रकूटधाम मंडल मेें 49 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर डाले गए हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम मेें यह सूचना आरटीआई कार्यकर्ता संकटा प्रसाद त्रिपाठी को वन विभाग ने दी है।
सूचना के मुताबिक बांदा जनपद में भूमि एवं जल संरक्षण के लिए कुल 3.41 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। चित्रकूट में 21.71 करोड़ और हमीरपुर में 14.49 करोड़ का खर्च बताया गया है। महोबा में 10.07 करोड़ खर्च होना बताया गया है। इस तरह पूरे मंडल में 49.68 करोड़ रुपये भूमि एवं जल संरक्षण के नाम पर बुंदेलखंड पैकेज से खर्च किए गए हैं।