प्रदर्शन के दौरान कलक्ट्रेट में हंगामा मचाने पर तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर की यहां अदालत में चल रही सुनवाई में करीब 14 साल से अदालत में उपस्थित न होने पर यहां के तत्कालीन डीएम धीरज साहू के विरुद्ध मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। साथ ही कारण बताओ नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने प्रदेश के प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर गवाह साहू को 6 जून 2018 को अदालत में उपस्थित होने के निर्देश देने को कहा है।
27 अक्तूबर 2004 को तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट श्रीनंदन चक्रवर्ती ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वे और एडीएम नवाब अली खां तथा अन्य कलक्ट्रेट कर्मी कार्यालय में मौजूद थे। इसी दौरान द्वारिकेश सिंह यादव मंडेल (अधिवक्ता) आए और तेज आवाज में जिला प्रशासन मुर्दाबाद व चोर और भ्रष्ट के नारे लगाए। अशोभनीय ढंग से बिना अनुमति कार्यालय में घुस आए।
डीएम से कहा कि मेरे बताए काम नहीं करते हो। मनमाने ढंग से कलक्टरी चला रहे हो ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। अपना शिकायती पत्र और शस्त्र लाइसेंस डीएम की मेज पर गुस्से से पटक दिया। कहा कि मेरा काम नहीं हुआ तो मैं आत्मदाह कर लूंगा। इस पर कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई। इसके पूर्व द्वारिकेश सिंह ने शस्त्र लिपिक के पटल पर भी हंगामा किया। सिटी मजिस्ट्रेट की तहरीर पर कोतवाली में द्वारिकेश सिंह यादव मंडेला के विरुद्ध धारा 452, 332, 353, 504, 506 आईपीसी और 7 क्रिमिनल ला एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई।
यह केस मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में चल रहा है। तत्कालीन डीएम धीरज साहू इसके गवाह हैं। उन्हें साक्ष्य के लिए अदालत ने कई बार तलब किया, लेकिन वे हाजिर नहीं हुए। इस पर शुक्रवार (25 मई) को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट खलीकुज्जमां ने साहू के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। हजरतगंज लखनऊ कोतवाली पुलिस को आदेश दिया कि उन्हें गिरफ्तार कर यहां अदालत में पेश करे। साथ ही पूर्व डीएम को कारण बताओ नोटिस भी जारी करते हुए 6 जून 2018 को प्रात: 9 बजे अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर कहा है कि उनके न्यायालय में चल रहे इस मामले में 6 अप्रैल 2010 को आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके हैं। साक्ष्य के लिए पत्रावली लगातार पेश की जा रही है, लेकिन गवाह तत्कालीन डीएम धीरज साहू उपस्थित नहीं हो रहे हैं। प्रमुख सचिव से अनुरोध किया है कि उन्हें यह नोटिस तामील कराकर निर्धारित तिथि में अदालत में उपस्थित होने का आदेश दें। गौरतलब है कि धीरज साहू बांदा में 25 जनवरी 2004 से 14 जुलाई 2005 तक जिलाधिकारी रहे। इस समय वह प्रदेश के आबकारी आयुक्त हैं।a