हत्या के दो मामलों में अदालत ने छह आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। पहले मामले में महिला की फावड़े से गला काटकर हत्या करने में अदालत ने पिता-पुत्र समेत चार अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दूसरे में गोली मारकर दलित युवक की हत्या मामले में अपर सत्र न्यायाधीश ने दो अभियुक्तों को आजीवन कारावास और जुर्माना की सजा सुनाई।
कालिंजर थाना क्षेत्र के पिपरा गांव निवासी रावेंद्र कुमार उर्फ भइयन पुत्र धरमदास ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 16 अक्तूबर 2013 को वह हरिद्वार गया था। घर में पत्नी रामा देवी उर्फ गुड़िया (36) और तीन बच्चे थे। रात को कुलकमल प्रसाद उर्फ बच्चा और उसका पुत्र पुष्पेंद्र उर्फ बब्बू, बबलू पुत्र दयाशंकर निवासीगण पिपरा व छोटा पुत्र लल्लन (बड़ी मऊ, कर्वी) ने फावड़े से रामा देवी की हत्या कर दी।
मकान को लेकर अभियुक्तों से विवाद था। तफ्तीश के बाद पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। सहायक शासकीय अधिवक्ता मूलचंद्र कुशवाहा ने गवाह पेश करते हुए अभियोजन की ओर से पैरवी की। वादी की ओर से अधिवक्ता चंद्रभान सिंह गौर रहे। अपर सत्र न्यायालय-प्रथम न्यायाधीश कृष्ण कुमार अस्थाना ने गुरुवार को इस केस का फैसला सुनाते हुए चारों अभियुक्तों को उम्रकैद और 10-10 हजार रुपये जुर्माना की सजा दी।
गोली मारकर दलित युवक की हत्या मामले में अपर सत्र न्यायाधीश ने दो अभियुक्तों को आजीवन कारावास और जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना जमा न करने पर एक-एक वर्ष की अतिरिक्त जेल भुगतना होगी। मटौंध थाना क्षेत्र के त्रिवेणी गांव के सिद्धू ने तहरीर में कहा था कि 16 सितंबर 2000 को शाम वह और पुत्र भोला व अन्य बांदा से वापस घर जा रहे थे। भोला भूरागढ़ तिराहे में किसी काम से रुक गया।
तिराहे के पास संतोष पुत्र वंशगोपाल, बत्तन उर्फ हरिनारायण पुत्र मइयादीन व राम प्रकाश उर्फ बद्दन पुत्र राजाभइया बंदूक लिए बैठे थे। काशी प्रसाद पुत्र टीकाराम फरसा और चंद्रपाल व राजू यादव पुत्रगण भरोसा लाठी लिए थे। 18 सितंबर को गांव की पगडंडी में भोला का शव मिला। उसकी गोली मारकर हत्या की गई थी।
पुलिस ने धारा 147, 148, 149, 302, 201 आईपीसी व एससीएसटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज करने के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। सहायक शासकीय अधिवक्ता फेरन पाल सिंह ने छह गवाह पेश किए। अपर सत्र न्यायाधीश (एससीएसटी एक्ट) डीपीएन सिंह ने बत्तन उर्फ हरिनारायण व राम प्रकाश को दोषी पाया। गुरुवार को अपने आदेश में दोनों अभियुक्तों को धारा 302 व एससीएसटी एक्ट में आजीवन कारावास व 10-10 हजार रुपये जुर्माना और धारा 201 में 5-5 वर्ष की जेल व 5-5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साक्ष्यों के अभाव में अन्य चार अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया गया।