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ललितपुर। थाना मड़ावरा अंतर्गत ग्राम रनगांव में छह माह पूर्व हुई दहेज हत्या के प्रकरण में जमानत पाने के लिए अभियुक्त द्वारा न्यायालय में कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए। जिला पूर्ति अधिकारी से तलब रिपोर्ट में राशनकार्ड दस्तावेज कूटरचित पाए जाने पर अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट हरकेश कुमार की अदालत ने अभियुक्त बसोरे पुत्र पिरुवा की जमानत याचिका खारिज कर दी।
सहायक शासकीय अधिवक्ता लखन यादव ने बताया कि थाना मड़ावरा अंतर्गत ग्राम सौंरई निवासी मगन अहिरवार की पुत्री कपूरी की शादी घटना से तीन वर्ष पूर्व ग्राम रनगांव निवासी ऊदल के साथ हुई थी। 23 अप्रैल 16 को मगन को सूचना मिली कि उसकी पुत्री की मौत हो गई है। उसने वहां जाकर देखा कि घर की म्यारी से उसके पुत्री फांसी के फंदे पर लटकी हुई थी, जबकि ससुरालीजन घर में नहीं थे। उक्त मामले में मगन की तहरीर पर पुलिस ने पुत्री के पति ऊदल और ससुर बसोरे के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और दहेज हत्या के मामले में रिपोर्ट पंजीकृत कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिए थे।
अभियुक्त बसोरे ने न्यायालय में जमानत याचिका प्रस्तुत करते हुए उक्त प्रकरण में झूठा फंसाने का आरोप लगाया। साथ ही बसोरे ने न्यायालय में जिलापूर्ति अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी किया हुआ राशन कार्ड संख्या 245445 को दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया। इसके अनुसार मृतका कपूरी व उसका पुत्र ऊदल पिता के साथ नहीं रहता था। उक्त राशन कार्ड की प्रमाणिकता के संबंध में न्यायालय द्वारा जिला पूूर्ति अधिकारी से मूल राशन कार्ड की आख्या तलब की। जिस पर 27 अक्टूबर को जिला पूर्ति अधिकारी द्वारा एपीएल कार्ड ग्राम पंचायत रनगांव विकास खंड मड़ावरा और जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय से जारी नहीं होना बताया गया। ऐसे में जमानत पाने के लिए कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत करने के उक्त मामले में न्यायालय ने अभियुक्त बसोरे पुत्र पिरुवा को दहेज प्रताड़ित और दहेज हत्या के उक्त मामले में जमानत को कूटरचित दस्तावेजों के प्रस्तुत करने को गंभीरता से लेते हुए पेेश की गई जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
बीडीओ जारी करते हैं गांव में राशन कार्ड
शहरी क्षेत्र में राशन कार्ड जिलापूर्ति अधिकारी द्वारा जारी किए जाते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीणों को राशन कार्ड उस क्षेत्र के खंड विकास अधिकारी द्वारा जारी होते हैं। ऐसे में जब अभियुक्त द्वारा ग्राम रनगांव के लिए जिलापूर्ति अधिकारी द्वारा जारी एपीएल राशन कार्ड प्रस्तुत किया गया तो न्यायालय द्वारा संदेह होने पर सत्यता के जांच के लिए दस्तावेज राशन कार्ड की जांच कराई गई, जिसमें राशन कार्ड कूटरचित पाया गया।