बांदा। दलित बिरादरी के पिता-पुत्र पर हमला कर उन्हें
घायल कर देने के जुर्म में चार आरोपियों को अदालत ने दो-दो वर्ष की कैद और
एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई मुकदमे का फैसला 15 साल बाद हुआ।
जसपुरा
कस्बा निवासी मलखान कोटार्य ने पांच जून 1999 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि
उसका पुत्र विक्रम दरवाजे के बाहर चारपाई पर लेटा था। गांव के ही चंद्रभूषण
सिंह और उसका पुत्र राजेश उर्फ लालू तथा दयाराम सिंह और रवि भूषण सिंह ने
उस पर लाठी से हमला कर दिया।
हमलावरों का कहना था कि वह चारपाई पर
क्यों लेटा? उसे बचाने आए पिता मलखान और बड़े भाई को मारपीट कर जख्मी कर
दिया गया। पुलिस ने कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करने के बाद डाक्टरी
परीक्षण कराया। विवेचना के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
अभियोजन
की ओर से ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह सेंगर ने नौ गवाह
पेश किए। शनिवार को विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) ने चारों आरोपियों
को धारा 323 में छह-छह माह की कैद और 500-500 रुपये जुर्माना, जुर्माना न
देने पर 15-15 दिन की अतिरिक्त कैद, धारा 504 में छह-छह माह की कैद और
एक-एक हजार रुपये जुर्माना या 15-15 दिन की अतिरिक्त, धारा 506 में दो-दो
वर्ष की कैद और एक-एक हजार रुपये जुर्माना या एक-एक माह की अतिरिक्त कैद के
आदेश दिए।
आरोपी राजेश उर्फ लालू सिंह को सिर्फ एससी/एसटी एक्ट
में तीन वर्ष की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न
देने पर छह माह की कैद और होगी।