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बुंदेलखंड में तीन किसानों की मौत

Fri, 18 Mar 2016 12:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,बांदा
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आत्महत्या
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बांदा। 12 बीघा जमीन में बमुश्किल सींच का इंतजाम कर डेढ़ बीघा में बोई मटर की फसल बारिश से सड़ जाने का सदमा युवा किसान को बर्दाश्त नहीं हुआ। खेत से लौटते ही उसने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
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सदर तहसील के जसईपुर गांव के रमाकांत (36) पुत्र मन्ना सिंह पटेल के पास 12 बीघा जमीन थी। बारिश न होने से बुआई नहीं कर सका। सिर्फ डेढ़ बीघा जमीन में सिंचाई का जुगाड़ कर मटर की फसल बो दी। फसल कुछ ही दिन में कटने की स्थिति में थी, लेकिन दो दिन पूर्व हुई बारिश से मटर सड़ गई।

बृहस्पतिवार को सुबह रमाकांत खेत गया। वहां फसल की हालत देखी तो उसे जबरदस्त सदमा पहुंचा। वह चुपचाप घर लौट आया। इसी बीच पुत्री सपना ने कपड़ों के लिए रुपये मांगे। बेटी की फरमाइश पूरी न कर पाने से रमाकांत का सदमा और गहरा हो गया।
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इसी बीच वह अटारी पर गया और दरवाजे बंद करके फांसी लगा ली। कुछ देर बाद पुत्री सपना की नजर पड़ी तो शोर मचाया। मृतक अपने पीछे पत्नी सहित तीन पुत्रियां छोड़ गया है। तीनों नाबालिग हैं।

मृतक के पिता मन्ना सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में भी खेत की फसल और बेटी को कपड़े के लिए पैसे न दे पाने का जिक्र किया है। पोस्टमार्टम हाउस में पूर्व जिला पंचायत सदस्य दलपत सिंह, बसपा नेता अय्यूब खां भी सांत्वना जताने पहुंचे।

उधर, तहसीलदार अनिल कुमार का कहना है कि किसान ने किसी घरेलू तनाव के चलते आवेश में आत्महत्या की है। खुद की और बटाई की 12 बीघा जमीन में उसकी फसल खड़ी है। फसल बर्बाद होने से दो किसानों की सदमे से मौत हो गई।

बांदा के सदर तहसील के चमरहा गांव निवासी किसान मुन्ना कहार पुत्र काशी प्रसाद के पास सात बीघा जमीन है। इसके साथ ही उसने 50 बीघा खेत बलकट (ठेके पर) में लिया था। सूखे के चलते खरीफ में ज्वार और अरहर की फसल सूख गई।

उधर, रबी में मसूर, चना व मटर की फसल भी खराब हो गई। बचीखुची फसल दो दिन पहले बारिश व ओलावृष्टि से चौपट हो गई। इसी सदमे में बुधवार की रात दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई। ग्राम प्रधान वीरेंद्र गुप्ता ने बताया कि मृतक ने तीन साल पहले साहूकारों से डेढ़ लाख रुपये कर्ज लिया था जिसे अदा करने का भी तनाव था। तहसील में सूचना देने के बावजूद कोई राजस्व कर्मी नहीं आया। पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद की मांग की है।

उधर, महोबा के श्रीनगर कस्बे के मोहल्ला भैरवगंज निवासी लक्ष्मी( 42 )पत्नी कमतू प्रजापति के पास महज तीन बीघा जमीन थी। इसी पर फसल से वह अपने परिवार का गुजारा करती थी। इसके साथ ही लक्ष्मी ईंट पथाई  का काम भी करती थी। लक्ष्मी ने गेहूं की फसल बोई थी। रविवार को ओलावृष्टि से फसल बर्बाद हो गई थी। इससे दुखी लक्ष्मी ने दो तीन दिन से अन्न जल ग्रहण नहीं किया था।

गुरुवार को लक्ष्मी खेत पर गई थीं। चौपट फसल का सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर पाईं। वह खेत में ही गिर गईं। लक्ष्मी के बेटे जयदिं ने बताया कि पिता की मौत 12 वर्ष पहले हो गई थी । मां ही खेती करती थीं। ओलावृष्टि से फसल बर्बाद हो गई। इसका सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर पाईं। 

गुरुवार को उनकी मौत हो गई। तहसीलदार नन्हकू के निर्देश पर कानूनगो मिथलेश दीक्षित व लेखपाल ने गांव पहुंचकर जानकारी ली। मिथलेश दीक्षित ने बताया कि वह  जांच रिपोर्ट तहसीलदार को सौंप देंगे।
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