पिसवाने के लिए दिया गया गेहूं किशोर ने बेच दिया। इस पर मां ने उसे डांट दिया। इससे क्षुब्ध किशोर ने खेत पर स्थित बबूल के पेड़ से फांसी लगाकर जान दे दी। किशोर सातवीं का छात्र था। बताया जाता है कि एक माह की फीस जमा न होने से वह कई दिनों से स्कूल भी नहीं जा रहा था।
तिंदवारी थाना क्षेत्र के सिंहपुर गांव में रमेश उर्फ बनवारी पाल के चौदह वर्षीय पुत्र जितेंद्र पाल का शव बुधवार को घर से कुछ दूर खेत पर लगे बबूल के पेड़ से फांसी से लटका मिला। परिजनों, ग्रामीणों और पुलिस के मुताबिक प्रथम दृष्टया उसने फांसी लगाकर आत्महत्या की है। घटना की पृष्ठभूमि में पता चला है कि पिता गुजरात में मजदूरी करते हैं। जितेंद्र पाल मां राजकली और छोटे भाई के साथ गांव में रहकर पढ़ाई कर रहा था। वह संकट मोचन आदर्श शिशु मंदिर विद्यालय में सातवीं का छात्र था।
यहां 150 रुपये प्रतिमाह फीस लगती थी। मंगलवार को मां ने कुछ गेहूं देकर जितेंद्र को पिसाने के लिए चक्की भेजा था, लेकिन जितेंद्र ने गेहूं बेच दिया। इस पर मां ने उसे डांट दिया था। बुधवार की सुबह होली मनाने पिता रमेश सूरत से गांव आ गये। कुछ ही देर बाद जितेंद्र शौच जाने की बात कहकर घर से निकल गया। कुछ देर बाद ग्रामीणों से सूचना मिली कि जितेंद्र का शव गांव के बाहर पेड़ से लटका हुआ है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
यह भी चर्चा है कि जितेंद्र ने दोस्तों के साथ काम धंधे की तलाश में मुंबई जाने के लिए घर का गेहूं बेचा था। पिता का कहना है कि उसे कुछ पता नहीं चला। घर लौटने पर जितेंद्र ने उसके पैर छुए और चाय-पानी कराया। वह ग्राम प्रधान के पास बैठा था तभी घटना की सूचना मिली। मां ने बताया कि होली को लेकर वह काफी खुश था। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राम सागर पाल की सूचना पर आई पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। उधर, थाना इंस्पेक्टर प्रतिमा सिंह का कहना है कि स्कूल न जाने पर मां ने डांट दिया था। इसी से क्षुब्ध होकर फांसी लगा ली।