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दोषियों की जल्द हो गिरफ्तारी

Wed, 03 Jan 2018 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बांदा
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मृतक अफसार की शोकग्रस्त पत्नी व बच्चे। - फोटो : अमर उजाला
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नरैनी। एसडीएम और उनके सुरक्षा गार्डों की कथित पिटाई से मरे गोरे पुरवा गांव के अफसार हुसैन की पत्नी शहरुन निसा पति की हत्या से गहरे सदमे में है। उसके कई मासूम बच्चे हैं। कहा कि मेरी किसी कोई रंजिश नहीं है। उसे सिर्फ इंसाफ चाहिए। सोमवार को सुबह खनिज बैरियर के पास खेत में गोरे पुरवा गांव के अफसार की शव बरामद हुआ था। सिर में चोटें थीं। मंगलवार को पत्नी शहरुन की तहरीर पर कोतवाली प्रभारी ने मंगलवार को एसडीएम नरैनी व उनके सुरक्षा गार्डों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। बुधवार को गोरे पुरवा गांव में मृतक अफसार की पत्नी बेहद सदमे में नजर आई। पड़ोसी महिलाएं उसे ढांढस बंधाती रहीं। पत्नी शहरुन ने बताया कि उनकी या उसके पति की किसी से कोई रंजिश नहीं थी। अफसार हंसमुख और सभी का सम्मान करता था। उसके सात बेटे और तीन बेटियां हैं। अब उनकी परवरिश उसी के कंधों पर है। यह बोझा अकेले वह कैसे ढो पाएगी ? फिलहाल उसे शासन-प्रशासन से इंसाफ की दरकार है। दोषियों को जेल भेजा जाना चाहिए। पूरे प्रकरण में पुलिस अधीक्षक  ने अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) दिवाकर सिंह व अपर एसपी को जांच सौंपी है। शहरुन को इन अधिकारियों से विशेष उम्मीदे हैं।

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कार्रवाई के खिलाफ लामबंद हुए कर्मचारी
नरैनी (ब्यूरो)। एसडीएम व सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज होने से नाराज राजस्व कर्मियों ने काम बंद कर विरोध जताया। आरपार की लड़ाई का ऐलान किया। जिला मुख्यालय पहुंच कर प्रभारी जिलाधिकारी को तीन सूत्री ज्ञापन दिया। बुधवार को तहसील के किसी भी कार्यालय में कामकाज नहीं हुआ। सभी कर्मियों व अधिकारियों ने एकजुट होकर आपात बैठक की। एसडीएम व सुरक्षा कर्मियों पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज करने का विरोध किया। कामकाज न करने का निर्णय लिया। दोपहर करीब 3 बजे दर्जन भर कर्मचारी जिला मुख्यालय पहुंच गए। प्रभारी जिलाधिकारी गंगाराम गुप्ता को तीन सूत्री ज्ञापन दिया। कहा कि रिपोर्ट तत्काल वापस ली जाए। गठित जांच कमेटी की जांच पूरी होने तक एसडीएम आदि के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। शासन से पूर्व अनुमति तथा समिति की आख्या के बिना प्राथमिक सूचना रिपोर्ट दर्ज करने वाले कोतवाली प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि राजस्व प्रशासन की स्वतंत्रता व पारदर्शी कार्यप्रणाली पर अंकुश लगाने की प्रयास है। यह दुर्भाग्य पूर्ण है। उधर, एसडीएम ने कहा है कि उन पर झूठे आरोप लगाए गए हैं। बालू माफियाओं पर कसे गए शिकंजे पर यह साजिश की गई। 

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