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2 राज्यों की पुलिस नहीं बचा पाई मासूमों की जान

Sun, 24 Feb 2019 11:16 PM IST
ASIF ASIF अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
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पोस्टमार्टम हाउस में सांत्वना देते एमपी चित्रकूट के विधायक नीलांशु चतुर्वेदी। - फोटो : अमर उजाला
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दो राज्यों की एसटीएफ और तीन जिलों की पुलिस तथा 20 लाख रुपये की फिरौती भी मासूम जुड़वां बच्चों को नहीं बचा पाई। सिरफिरों ने सारी कोशिशों पर पानी फेरते हुए मासूमों की हत्या कर शव नदी में फेंक दिए। 12 दिनों से हाथ-पैर मार रही पुलिस के हाथ ही शव लगे। इस मामले में एमपी पुलिस ने छह युवकों को गिरफ्तार किया है। इनमें तीन चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग छात्र हैं। दो छात्र बांदा जिले के हैं। घटना का मास्टर माइंड चित्रकूट के संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य का बेटा बताया जा रहा है। रविवार को बांदा मेडिकल कालेज में शवों का दो डाक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। 

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12 फरवरी को दोपहर साढ़े 12 बजे चित्रकूट (सतना, मध्य प्रदेश) के सद्गुरु पब्लिक स्कूल के यूकेजी के छात्र जुड़वां भाई 6 वर्षीय प्रियांश एवं श्रेयांश को घर जाते समय स्कूल परिसर में ही स्कूल बस से बाइक सवारों ने तमंचे के बल पर अपहरण कर लिया था। दोनों बच्चों को बाइक पर बैठाकर अपहरणकर्ता फरार हो गए थे। बच्चों के पिता बृजेश रावत चित्रकूट में दर्दनाशक तेल का व्यवसाय करते हैं। दो दिन बाद अपहरणकर्ताओं ने बच्चों के पिता को फोन कर दो करोड़ फिरौती मांगी थी। यह फोन बांदा से किया गया था। घटना के एक हफ्ते बाद 20 फरवरी को बच्चों के पिता ने अपने सूत्रों से अपहरणकर्ताओं तक 20 लाख रुपये पहुंचा दिए थे।

उधर, एमपी और सीमावर्ती यूपी की एसटीएफ तथा सतना, चित्रकूट और बांदा जिले की पुलिस बच्चों और अपहरणकर्ताओं की तलाश में जुटी थी। दिन रात दबिशें देकर हर संदिग्ध से पूछताछ की जा रही थी। 12 से ज्यादा लोगों को हिरासत मे लेकर पूछताछ की गई। पुलिस ने छह युवकों को गिरफ्तार कर लिया। उनसे मिली जानकारी और निशानदेही पर शनिवार की आधी रात यूपी-एमपी पुलिस ने बांदा जिले के मरका थाना क्षेत्र के बाकल गांव के पास जोगिनी दाई मंदिर के सामने यमुना नदी में दोनों बच्चों के शव बरामद किए। उनके हाथ-पैर लोहे की जंजीर से बंधे थे। शव जाल में लिपटे थे। दोनों शवों का बांदा राजकीय मेडिकल कालेज में रविवार को पोस्टमार्टम कराया गया। 
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पुलिस द्वारा गिरफ्तार युवकों मेें बांदा के मरका थानांतर्गत भभुवा गांव निवासी राजू द्विवेदी पुत्र राकेश कुमार द्विवेदी और इसी गांव के छोटू पुत्र ब्रह्मदत्त तथा बांदा के बिसंडा थानांतर्गत तेंदुरा गांव निवासी लकी सिंह तोमर पुत्र सत्येंद्र सिंह तोमर तथा बांदा के ही रामकेश यादव पुत्र रामशरण यादव, नयागांव (चित्रकूट, एमपी) निवासी पद्म शुक्ला पुत्र रामकरण शुक्ला तथा बहलपुर (बिहार) निवासी विक्रमजीत सिंह पुत्र प्रहलाद सिंह और हमीरपुर जिले के गुरदहा गांव निवासी पिंटू उर्फ पिंटा पुत्र रामस्वरूप यादव शामिल हैं। इनके पास से फिरौती में वसूले गए 17 लाख 65 हजार रुपये कैश, तीन तमंचे, तीन बाइकें और एक बोलेरो बरामद हुए हैं। 

बांदा की बाइक ने पकड़ाया अभियुक्तों को 
बांदा। बच्चों के अपहरणकर्ता उनके परिजनों से संपर्क करने के लिए विभिन्न स्थानों पर राहगीरों से मांगा फोन इस्तेमाल करते रहे। उनकी यही हरकत ने उनको पुलिस तक पहुंचा दिया। 20 फरवरी को अपहरणकर्ताओं ने किसी राहगीर का फोन लेकर बात की तो मोबाइल फोन धारक को शंका हुई। उसने अपने मोबाइल फोन से अपहरणकर्ताओं की बाइक की नंबर प्लेट का फोटो खींच लिया। यह नंबर पुलिस को पहुंच गया। पुलिस के मुताबिक यह बाइक (यूपी90 एल5707) बांदा जिले के मरका थाना क्षेत्र के भभुवा अंश गांव निवासी रोहित द्विवेदी पुत्र ब्रह्मदत्त द्विवेदी की थी। पुलिस ने राजू को दबोच लिया। उसी ने सारा खुलासा किया। इसी के बाद अन्य आरोपी गिरफ्तार हुए। 

शुरू से ही शक के दायरे में था बांदा 
बांदा। दिनदहाड़े फिल्मी स्टाइल में बच्चों के अपहरण की घटना भले ही सीमावर्ती मध्य प्रदेश में हुई, लेकिन इसके तार बांदा से जुड़े होने की आशंका शुरू से ही प्रतीत हो रही थी। सर्विलांस फोन ने इस शंका पर सच की मोहर लगा दी। पिछले हफ्ते बांदा रेलवे स्टेशन के बाद छावनी मोहल्ले से एमपी की एसटीएफ ने एक युवक को उठाया था। उस युवक का फोन मांगकर अपहरणकर्ताओं से बच्चों के परिजनों से संपर्क किया था। अब घटना का पुरा खुलासा होने पर यह बात सामने आ गई कि इस जघन्य वारदात में बांदा निवासी तीन युवक शामिल हैं। हालांकि उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं बताया जा रहा। तीनों चित्रकूट के ग्रामोदय विश्वविद्यालय के छात्र हैं। वहीं रहकर पढ़ाई कर रहे थे।

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