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तीन माह से बैंक में झांकने तक नहीं आई पुलिस

Mon, 11 Jan 2016 11:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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बांदा। दिनदहाड़े बैंक की दहलीज पर गोली मारकर लूट की घटना ने शहर में बैंकों की सुरक्षा की पोल खोल दी है। कुछ दिन पहले हरेक बैंक में दो सशस्त्र पुलिस कर्मियों की ड्यूटी की असलियत भी सामने आ गई। लुटेरों ने जिस बैंक के गेट पर वारदात की, वहां पिछले तीन माह से कोई भी पुलिस कर्मी झांकने तक नहीं गया।
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सेंट्रल बैंक (सिटी ब्रांच) के मैनेजर केपी यादव ने बताया कि एक माह पहले उन्होंने पुलिस क्षेत्राधिकारी को इसकी सूचना भी दी थी।

मर्दननाका चौकी के पुलिस कर्मी पहले यहां आते थे। प्रबंधक ने बताया कि बैंक में खुद का सिक्योरिटी गार्ड भी नहीं है। बैंक की ड्योढ़ी पर हुई वारदात से बैंककर्मी भी सहमे हैं। इस बैंक में लगभग 10 लाख रुपये तक कैश रहता है।

प्रबंधक ने बताया कि घटना के समय वे अपने चेंबर में थे। बाहर से फायर की आवाज आने पर वे समझे कि पटाखा छूटा है।

इसी बीच बैंककर्मी बाहर आए तो देखा कि उनके बैंक से पैसा लेकर निकल रहा व्यक्ति खून से लथपथ पड़ा है। बैंककर्मियों ने तत्काल शहर कोतवाली को फोन पर सूचना दी, किंतु पुलिस काफी देर से पहुंचे।
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डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी ने बताया कि शुरुआती जांच से यह प्रतीत होता है कि लुटेरों को बैंक से बड़ी रकम निकाले जाने की पूरी जानकारी पहले से थी।

डीआईजी ने स्वीकारा कि शहर कोतवाली पुलिस सुरक्षा और गश्त आदि के मामले में ढिलाई बरत रही है। इसी से ऐसी घटनाएं हो रही हैं। डीआईजी ने कहा कि लापरवाह पुलिस कर्मचारियों की पहचान कर उन्हें दंडित किया जाएगा।

लूट के बाद घायल मदरसा चपरासी के बयान और अन्य पूछताछ में जुटे नगर क्षेत्राधिकारी विनोद सिंह का कहना है कि चुनावों के चलते फोर्स की कमी से बैंकों में पुलिस कर्मियों की ड्यूटी नहीं लग पा रही है।

बैंक खुद भी अपनी सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी गार्ड का इंतजाम करते हैं। सेंट्रल बैंक सिटी ब्रांच प्रबंधक के इस कथन कि उन्होंने पुलिस ड्यूटी के लिए एक माह पूर्व पत्र लिखा था, क्षेत्राधिकारी ने इनकार किया।

बताया कि लुटेरों को दबोचने के लिए उनके और कोतवाली प्रभारी के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच सहित तेज तर्रार दरोगाओं को लगाया गया है। सुराग हाथ लग गए हैं। जल्द ही लुटेरे पकड़े जाएंगे।

कर्मचारी को गोली मारकर मदरसे की तनख्वाह के दो लाख रुपये लुट जाने पर दारुल उलूम मदरसा रब्बानिया में भी रोष और अफसोस है।

खबर मिलते ही बड़ी तादाद में मदरसे के लोग अस्पताल पहुंचे और घायल अब्दुल हफीज को प्राथमिक इलाज के बाद कानपुर पहुंचाया। मदरसे के मौलाना मेराज मसूदी (अकील मियां), मौलाना डा. अबरार अहमद, जीशान रब्बानी भी अस्पताल पहुंचे।

मदरसे वालों ने बताया कि हर माह वेतन का पैसा निकालने दो-तीन कर्मचारी जाते हैं। अब्दुल हफीज अक्सर बैंक से पैसा लाता है।

इस बार भी उसके साथ मदरसे के टीचर फरहान आलम को मदरसे की बोलेरो से भेजा गया था। फरहान और इब्राहीम का कहना है कि बदमाशों के तमंचा अड़ा देने से वे सहम गए थे।
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